राजगढ़ में भूकंप आपदा का रियलिस्टिक ट्रायल, मेगा मॉक ड्रिल में परखी गई राहत-बचाव व्यवस्था

15 जून :हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (HPSDMA) और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को राजगढ़ में 10वीं राज्य स्तरीय मेगा मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस दौरान भूकंप के कारण भवन ढहने का काल्पनिक परिदृश्य तैयार कर विभिन्न विभागों की आपदा से निपटने की तैयारियों, संसाधनों की उपलब्धता और आपसी समन्वय का व्यापक परीक्षण किया गया।

मॉक ड्रिल के तहत सोलन-राजगढ़ मार्ग पर शिरगुल चौक के समीप एक भवन के गिरने की सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग, राजस्व विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां तत्काल मौके पर पहुंच गईं। राहत एवं बचाव दलों ने मलबे में फंसे लोगों की खोज शुरू करते हुए घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर उपचार के लिए भेजा।

घायलों को नेहरू मैदान में स्थापित अस्थायी अस्पताल में पहुंचाया गया, जहां स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उनका प्राथमिक उपचार किया। वहीं रेस्क्यू अभियान के दौरान मृतकों के शव निकालने, उनकी पहचान करने तथा आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने की प्रक्रिया का भी अभ्यास किया गया। इसके लिए नेहरू मैदान में अस्थायी शवगृह भी बनाया गया था।

आपदा में प्रभावित और बेघर हुए लोगों के लिए राजगढ़ वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में राहत शिविर स्थापित किया गया। यहां राशन, कंबल, गैस सिलेंडर, बर्तन और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था का प्रदर्शन किया गया। राहत शिविर के संचालन, पंजीकरण और राहत वितरण की प्रक्रिया को भी परखा गया।

मलबा हटाने के लिए जेसीबी मशीनों और टिप्परों का उपयोग किया गया, जबकि घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस सहित विभिन्न विभागों के वाहन लगातार राहत एवं बचाव कार्य में जुटे रहे। खंड स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. उपासना के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम पूरे अभियान के दौरान सक्रिय रही।

पूरे अभियान का निरीक्षण एसडीएम राजगढ़ राज कुमार ठाकुर ने किया। उन्होंने मौके पर पहुंचकर विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली का जायजा लिया और आपदा की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

एसडीएम राज कुमार ठाकुर ने बताया कि मेगा मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य प्राकृतिक अथवा मानवजनित आपदाओं के दौरान खोज एवं बचाव, घायलों को प्राथमिक उपचार, राहत शिविरों की स्थापना, संचार व्यवस्था तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की क्षमता का परीक्षण करना था। उन्होंने बताया कि भवन ढहने के इस काल्पनिक परिदृश्य में 150 लोगों के फंसे होने की कल्पना की गई थी, जिनमें 11 लोगों को मृत और 50 लोगों को घायल दर्शाया गया।

ड्रिल के व्यापक परिदृश्य में पूरे राजगढ़ उपमंडल में भूकंप से भारी तबाही की स्थिति दर्शाई गई। काल्पनिक आंकड़ों के अनुसार 110 लोगों की मृत्यु, 1225 लोगों के घायल होने तथा 310 लोगों के अस्पतालों में उपचाराधीन होने का परिदृश्य तैयार किया गया। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोगों के बेघर होने की स्थिति दिखाकर राहत एवं पुनर्वास व्यवस्था की प्रभावशीलता भी जांची गई।

राजगढ़ में आयोजित इस राज्य स्तरीय मेगा मॉक ड्रिल ने यह संदेश दिया कि आपदा के समय प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, अग्निशमन सेवा और अन्य विभाग किस प्रकार समन्वित ढंग से कार्य कर जनहानि को कम कर सकते हैं तथा प्रभावित लोगों तक त्वरित राहत पहुंचा सकते हैं। इस अभ्यास से भविष्य में किसी वास्तविक आपदा की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासनिक तैयारियों को और अधिक मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

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