11 जून : हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की सुरक्षा, बुनियादी सुविधाओं और समावेशी शिक्षा को लेकर किए गए सोशल ऑडिट में कई गंभीर कमियां उजागर हुई हैं। हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी की टीम द्वारा तैयार रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि जिले का कोई भी सरकारी स्कूल भवन निर्धारित ऑल-वेदर मानकों को पूरा नहीं करता। वहीं अधिकांश स्कूलों में बच्चों के मार्गदर्शन के लिए चाइल्ड काउंसलर की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत आयोजित सोशल ऑडिट और पब्लिक हियरिंग में करीब 1700 लोगों ने भाग लिया। इसमें ग्रामीणों, शिक्षकों, अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन समितियों के सदस्यों ने स्कूलों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अपनी राय रखी और अधिकारियों से सवाल किए। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य कमियों की पहचान कर उनमें सुधार लाना है।
सोशल ऑडिट रिपोर्ट के प्रमुख डॉ. रणधीर रांटा के अनुसार जिले के 2340 स्कूलों में से 497 स्कूलों का सर्वेक्षण किया गया। 175 से अधिक सवालों के आधार पर छह अलग-अलग क्षेत्रों का मूल्यांकन कर यह रिपोर्ट तैयार की गई है। शेष स्कूलों का सर्वेक्षण आगामी महीनों में पूरा किया जाएगा।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने वाला ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम जिले के कई स्कूलों में शुरू नहीं किया गया है। इसके अलावा दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए आवश्यक सुविधाओं की भी भारी कमी पाई गई।
सोशल ऑडिट टीम के अनुसार कई स्कूलों में पुस्तकालय प्रभावी ढंग से संचालित नहीं हो रहे हैं और बच्चों की आयु के अनुरूप पुस्तकें उपलब्ध नहीं हैं। पब्लिक हियरिंग के दौरान ग्रामीणों ने बिना भवन के चल रही कक्षाओं, बुनियादी ढांचे की कमी, डिजिटल शिक्षा, विद्यार्थियों की सुरक्षा और स्कूलों को मिलने वाले फंड के उपयोग को लेकर भी चिंता जताई।