सुंदरनगर में ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ, किसानों को दी वैज्ञानिक खेती की जानकारी

3 जून: सुंदरनगर में कृषि विज्ञान केंद्र, आत्मा मंडी और कृषि विभाग मंडी के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ का शुभारंभ किया गया। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय तथा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के निर्देशानुसार यह अभियान 1 जून से 30 जून तक देशभर में चलाया जा रहा है।

अभियान के शुभारंभ अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 62 प्रगतिशील किसानों और कृषक महिलाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान किसानों को अभियान के उद्देश्यों और कृषि संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई।

कृषि विज्ञान केंद्र के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. पंकज सूद ने कहा कि कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ भूमि और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि मृदा स्वास्थ्य में गिरावट, असंतुलित उर्वरक उपयोग, जल संसाधनों पर बढ़ता दबाव और फसल विविधता में कमी जैसी चुनौतियां कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता को प्रभावित कर रही हैं। इन्हीं समस्याओं के समाधान और किसानों को जागरूक करने के उद्देश्य से ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू किया गया है।

उन्होंने किसानों को मृदा परीक्षण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड के उपयोग, उर्वरकों के संतुलित प्रयोग, जैविक एवं कार्बनिक स्रोतों के समावेशन, जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, फसल चक्र तथा समन्वित कीट प्रबंधन जैसी वैज्ञानिक तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। साथ ही खेतों में उपलब्ध जैविक संसाधनों के अधिकतम उपयोग और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए वैज्ञानिक सिफारिशों को अपनाने का आह्वान किया।

डॉ. सूद ने बताया कि अभियान के तहत जून माह में मंडी जिले के विभिन्न विकास खंडों और गांवों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनके माध्यम से किसानों को मृदा संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग, जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती और आधुनिक कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक किया जाएगा।

इस अवसर पर आत्मा प्रोजेक्ट मंडी के उप परियोजना निदेशक डॉ. संजय ठाकुर ने प्राकृतिक खेती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पद्धति उत्पादन लागत कम करने के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और मानव स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। उन्होंने किसानों को स्थानीय संसाधनों पर आधारित खेती अपनाने और रासायनिक आदानों पर निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित किया।

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