29 मई: सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि अगले तीन महीने के भीतर पूरे देश में आपातकालीन सहायता के लिए केवल एक हेल्पलाइन नंबर ‘112’ शुरू किया जाए। अदालत ने ट्रॉमा केयर को मजबूत बनाने के साथ-साथ नेक मददगारों (गुड समैरिटन) के लिए शिकायत निवारण प्रणाली स्थापित करने के भी आदेश दिए हैं।
जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदुरकर की बेंच ने सेव लाइफ फाउंडेशन की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि सड़क दुर्घटना या अन्य आपात स्थितियों में समय पर मेडिकल सहायता मिलना बेहद जरूरी है। अदालत ने राज्यों को नियमित मासिक बैठकें आयोजित कर अनुपालन रिपोर्ट जमा करने और संबंधित पोर्टल पर जानकारी अपलोड करने के निर्देश भी दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दुर्घटना के बाद शुरुआती कुछ मिनट सबसे अहम होते हैं। यदि समय पर ट्रॉमा केयर और मेडिकल सहायता नहीं मिलती, तो पीड़ित की जान बचने की संभावना कम हो जाती है। अदालत ने माना कि ट्रॉमा केयर का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अदालत ने यह भी कहा कि ट्रॉमा केयर व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पूरे देश में एक समान ढांचा, जनजागरूकता, प्राथमिक चिकित्सा कौशल का मानकीकरण और गुड समैरिटन कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करना जरूरी है।