28 मई: मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने पहाड़ी राज्यों में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं को लेकर चिंता जताते हुए कहा है कि आने वाले समय में उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों में भी बादल फटने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और संतुलित शहरी विकास पर विशेष जोर दिया।
मुख्यमंत्री शिमला के गेयटी थिएटर में आयोजित कार्यक्रम में ‘सिटी लिमिट्स – द क्राइसिस ऑफ अर्बनाइजेशन’ पुस्तक के विमोचन अवसर पर संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी प्राकृतिक आपदाएं झेली हैं, जिनसे भारी नुकसान हुआ है।
उन्होंने बताया कि अब बादल फटने की घटनाएं केवल ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि निचले इलाकों में भी देखने को मिल रही हैं। इस विषय पर वैज्ञानिक अध्ययन भी किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल को स्वच्छ हवा और पानी जैसी प्राकृतिक संपदा मिली है, जिसका संरक्षण सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने शिमला में तेजी से बढ़ते शहरीकरण पर चिंता जताते हुए कहा कि जिन क्षेत्रों में पहले जंगल थे, वहां अब भवन निर्माण हो रहा है।
सुक्खू ने बताया कि शिमला में ओवरहेड तार हटाने, आधुनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण, पानी की बेहतर आपूर्ति और शहर की सुंदरता बनाए रखने के लिए कई परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार नई टाउनशिप विकसित करने और पर्यटन ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भी कार्य कर रही है, ताकि प्रदेश में संतुलित विकास सुनिश्चित किया जा सके।