26 मई: हिमाचल प्रदेश सरकार को औद्योगिक बिजली रियायत मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि राज्य की 2019 औद्योगिक नीति के तहत बिजली दरों में दी जाने वाली छूट केवल नई स्थापित औद्योगिक इकाइयों के लिए लागू होगी, जबकि बड़े पैमाने पर विस्तार कर रही पुरानी इकाइयां इस लाभ की हकदार नहीं होंगी।
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें एक निजी कंपनी को ऊर्जा शुल्क पर 15 प्रतिशत छूट देने के निर्देश दिए गए थे। संबंधित कंपनी पहले से संचालित इकाई थी और उसने केवल विस्तार कार्य किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि 2019 औद्योगिक नीति की धारा 16(ए) केवल नई औद्योगिक इकाइयों के लिए बनाई गई थी, जबकि बड़े स्तर पर विस्तार कर रही मौजूदा इकाइयों को धारा 16(बी) के तहत अलग प्रकार के लाभ दिए जाने का प्रावधान था।
अदालत ने यह भी माना कि नीति की संरचना, शुल्क आदेशों और नियमों की व्याख्या से साफ है कि रियायती बिजली दरों का उद्देश्य नई इकाइयों को प्रोत्साहन देना था, न कि पुरानी इकाइयों के विस्तार को।