बिलासपुर निकाय चुनाव में भाजपा का क्लीन स्वीप, चारों नगर निकायों पर लहराया भगवा

18 मई : जिला बिलासपुर के नगर निकाय चुनाव 2026 में भाजपा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चारों निकायों पर कब्जा जमा लिया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के गृह जिले में मिली इस बड़ी जीत ने जिले की राजनीतिक तस्वीर बदल दी है। नगर परिषद बिलासपुर, घुमारवीं, श्री नयनादेवी और नगर पंचायत शाहतलाई में भाजपा ने जीत हासिल कर अपनी मजबूत संगठनात्मक पकड़ का प्रदर्शन किया।

नगर परिषद बिलासपुर में भाजपा ने 11 में से 9 वार्ड जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया, जबकि कांग्रेस केवल दो सीटों तक सीमित रह गई। सदर बिलासपुर क्षेत्र में विधायक त्रिलोक जम्वाल की बूथ स्तर तक की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती भाजपा की बड़ी ताकत बनी। वहीं कांग्रेस नेता बंबर ठाकुर भाजपा की बढ़त को रोकने में सफल नहीं हो पाए।

घुमारवीं नगर परिषद चुनाव इस बार बेहद प्रतिष्ठापूर्ण माना जा रहा था। यहां भाजपा ने नौ में से पांच सीटें जीतकर सत्ता की राह आसान कर ली, जबकि कांग्रेस दो सीटों पर सिमट गई। दो निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत से समीकरण बदले जरूर, लेकिन बढ़त भाजपा के पक्ष में रही। पूर्व मंत्री राजेंद्र गर्ग ने चुनाव में भाजपा कार्यकर्ताओं को एकजुट बनाए रखा। दूसरी ओर मंत्री राजेश धर्माणी कांग्रेस का गढ़ बचाने में सफल नहीं हो सके।

नगर परिषद श्री नयनादेवी में भाजपा ने सात में से पांच सीटें जीतकर कांग्रेस से सत्ता छीन ली। पिछली बार यहां कांग्रेस का कब्जा था, लेकिन इस बार विधायक रणधीर शर्मा की सक्रिय रणनीति और कार्यकर्ताओं की मजबूत पकड़ ने चुनावी माहौल बदल दिया। पूर्व मंत्री रामलाल ठाकुर कांग्रेस को निर्णायक बढ़त नहीं दिला सके।

नगर पंचायत शाहतलाई में भाजपा ने लगातार दूसरी बार सत्ता बरकरार रखी। यहां भाजपा ने सात में से पांच सीटें जीतकर कांग्रेस को दो सीटों तक सीमित कर दिया। विधायक जेआर कटवाल की डोर-टू-डोर रणनीति भाजपा की जीत का अहम आधार बनी। वहीं युवा कांग्रेस नेता विवेक कुमार की मेहनत के बावजूद पार्टी को सफलता नहीं मिल सकी।

निकाय चुनाव परिणामों ने यह साफ संकेत दिया है कि बिलासपुर जिले में भाजपा का संगठन अभी भी बेहद मजबूत स्थिति में है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह जीत आने वाले पंचायत और विधानसभा चुनावों में भाजपा के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त साबित हो सकती है। बूथ स्तर पर मजबूत संगठन, नेताओं की सक्रिय फील्डिंग, महिला मतदाताओं का समर्थन और कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी भाजपा की जीत के प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

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