राजगढ़-पझौता में ओलावृष्टि का कहर, नकदी फसलें तबाह; किसानों-बागवानों ने मांगी राहत

7 मई, रवी दत्त भारद्वाज: सिरमौर जिला की राजगढ़ तहसील और उपतहसील पझौता क्षेत्र में पिछले तीन-चार दिनों से जारी बारिश और भारी ओलावृष्टि ने किसानों और बागवानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। राजगढ़ और पझौता क्षेत्र की करीब 34 पंचायतों में अलग-अलग स्थानों पर हुई ओलावृष्टि से नकदी फसलें, बागवानी और सब्जियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। हालात ऐसे हैं कि क्षेत्र का शायद ही कोई इलाका बचा हो जहां मौसम की मार न पड़ी हो।

इन दिनों क्षेत्र में सेब, नाशपाती, आड़ू, प्लम और खुमानी की फसलें लगी हुई हैं। बागवानों के मुताबिक तेज ओलावृष्टि के कारण फलों पर गहरे निशान पड़ गए हैं, जिससे उनकी गुणवत्ता और बाजार भाव दोनों प्रभावित होंगे। कई किसानों का कहना है कि इस बार बेहतर उत्पादन की उम्मीद थी, लेकिन खराब मौसम ने सारी मेहनत खराब कर दी।

राजगढ़ क्षेत्र में बड़े स्तर पर उगाई जाने वाली बबूना (कैमोमाइल) फूल की फसल को भी भारी नुकसान पहुंचा है। यह फसल यहां के किसानों की नकदी आय का अहम स्रोत मानी जाती है, लेकिन ओलों ने इसे लगभग पूरी तरह नष्ट कर दिया।

अनाज और सब्जी उत्पादकों को भी नुकसान झेलना पड़ा है। मटर, गेहूं, जौ और सरसों की फसलें कटाई के लिए तैयार थीं, लेकिन बारिश और ओलों ने इन फसलों को भी प्रभावित किया है। वहीं फूलगोभी, फ्रेंच बीन, शिमला मिर्च और टमाटर जैसी सब्जियों की खेती भी बर्बाद हुई है।

किसानों के अनुसार कई इलाकों में इतनी अधिक ओलावृष्टि हुई कि खेतों और बगीचों में दो से तीन इंच तक ओलों की परत जम गई। इससे फसलें, सब्जियां और पौधे पूरी तरह दब गए।

लगातार खराब मौसम और प्राकृतिक आपदा के कारण किसान और बागवान आर्थिक संकट में आ गए हैं। उनका कहना है कि फसलें खराब होने से अब परिवार का भरण-पोषण और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो सकता है।

प्रभावित किसानों और बागवानों ने प्रदेश सरकार और प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों का तुरंत सर्वे करवाकर नुकसान का सही आकलन किया जाए और राहत व मुआवजा पैकेज जारी किया जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते सहायता नहीं मिली तो क्षेत्र के हजारों परिवार आर्थिक संकट में फंस सकते हैं।

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