7 मई : हिमाचल प्रदेश सरकार प्रदेश के करीब 100 ऐसे सरकारी स्कूलों को बंद करने या मर्ज करने की तैयारी में है, जहां विद्यार्थियों की संख्या बेहद कम है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा निदेशालय ने प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को भेज दिया है। अब अंतिम फैसला मुख्यमंत्री स्तर पर लिया जाएगा।
जानकारी के अनुसार कई स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या शून्य है, जबकि कुछ संस्थानों में केवल 5 या उससे भी कम छात्र अध्ययनरत हैं। निर्धारित नियमों के तहत यदि किसी स्कूल में 5 से कम विद्यार्थी हों तो उसे नजदीकी स्कूल के साथ मर्ज किया जा सकता है। हालांकि, कुछ शिक्षण संस्थान दूरदराज क्षेत्रों में स्थित हैं, जहां दूसरे स्कूल काफी दूरी पर हैं। ऐसे मामलों को लेकर सरकार अभी विचार कर रही है।
इससे पहले मंत्रिमंडल मुख्यमंत्री को ऐसे स्कूलों को बंद या मर्ज करने के लिए अधिकृत कर चुका है, इसलिए इस प्रस्ताव को दोबारा कैबिनेट में ले जाने की आवश्यकता नहीं होगी। मुख्यमंत्री कार्यालय से मंजूरी मिलने के बाद संबंधित आदेश जारी किए जाएंगे।
बुधवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में लगभग 100 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां विद्यार्थियों की संख्या बहुत कम है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में प्रस्ताव मुख्यमंत्री को भेजा गया है। इसके अलावा कुछ स्कूलों का दर्जा कम करने का प्रस्ताव भी सरकार के विचाराधीन है।
शिक्षा मंत्री ने जमा दो परीक्षा परिणाम पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस बार सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए टॉप किया है। उन्होंने इसे शिक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों का सकारात्मक परिणाम बताया।
वहीं, प्रदेश में लगातार खराब मौसम पर चिंता जताते हुए रोहित ठाकुर ने कहा कि बेमौसमी बारिश से बागवानों और किसानों को भारी नुकसान हुआ है। शुरुआती आकलन के अनुसार सेब की फसल को करीब 40 प्रतिशत तक नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि सेब के अलावा अन्य फसलें भी मौसम की मार से प्रभावित हुई हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि हिमाचल प्रदेश लगातार प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहा है और केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह प्रदेश के साथ भेदभाव कर रही है।