पंचायत चुनाव में सख्ती: नशा तस्कर और डिफॉल्टर अब नहीं लड़ पाएंगे चुनाव

6 मई: हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को अधिक पारदर्शी और स्वच्छ बनाने के लिए राज्यपाल ने हिमाचल प्रदेश पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी के साथ ही अब चिट्टा/हेरोइन जैसे सिंथेटिक नशे के अवैध कारोबार में संलिप्त या जिन पर ऐसे मामलों में आरोप तय हो चुके हैं, वे पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। यह नियम आगामी चुनावों से ही लागू होगा।

राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में पारित इस विधेयक का उद्देश्य पंचायत स्तर पर आपराधिक और संदिग्ध छवि वाले लोगों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखना है। इसके तहत यदि कोई निर्वाचित प्रतिनिधि चुनाव जीतने के बाद नशे के मामलों में संलिप्त पाया जाता है या उसके खिलाफ आरोप तय होते हैं, तो उसे पद से हटाया जा सकेगा।

विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अवैध कब्जा करने वाले, सहकारी बैंकों के डिफॉल्टर तथा ऑडिट रिकवरी लंबित रखने वाले व्यक्ति भी पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य होंगे। सरकार का मानना है कि इन सख्त प्रावधानों से पंचायतों में पारदर्शिता बढ़ेगी और विकास कार्यों को गति मिलेगी।

इसके साथ ही पंचायतों की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए कोरम से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। अब ग्राम सभा की बैठक में कम से कम 30 सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होगी, साथ ही कुल मतदाताओं की 10 प्रतिशत भागीदारी जरूरी होगी। परिवार के आधार पर उपस्थिति को मान्यता नहीं दी जाएगी। जिला परिषद स्तर पर कोरम की सीमा को एक-तिहाई कर दिया गया है, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज किया जा सके।

इसके अलावा, 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुका वह व्यक्ति, जिसका नाम परिवार रजिस्टर या ग्राम सभा की मतदाता सूची में दर्ज है, ग्राम सभा का सदस्य माना जाएगा।

Social Sharing

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *