2 मई: वन विभाग में सहायक वन रक्षक के नए पद सृजित करने और वन रक्षक के पदों को समाप्त करने के प्रस्ताव को लेकर अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ, धर्मशाला वृत्त ने कड़ा विरोध जताया है। महासंघ ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि इस निर्णय को वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।
संघ के निवर्तमान अध्यक्ष संदीप गुलेरिया ने बताया कि वन विभाग प्रदेश के सबसे पुराने विभागों में से एक है, जो हिमाचल प्रदेश की 66 प्रतिशत से अधिक भूमि की सुरक्षा करता है। वर्तमान में विभाग में 700 से अधिक पद खाली हैं, लेकिन केवल 500 पदों पर भर्ती की बात की जा रही है। साथ ही इन पदों को समाप्त कर सहायक वन रक्षक के नए पद बनाए जा रहे हैं, जिसे उन्होंने पूरी तरह अनुचित बताया।
महासंघ के महासचिव नितिन राजपूत ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वन रक्षक विभाग का सबसे महत्वपूर्ण और जिम्मेदारी भरा पद है, जिसे कमजोर करने के बजाय और मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस फैसले से कर्मचारियों के पदोन्नति के अवसर कम होंगे और युवाओं के भविष्य पर भी असर पड़ेगा।
उन्होंने सरकार से मांग की कि 500 पदों के बजाय सभी 700 रिक्त पदों को भरा जाए और वन रक्षक के पदनाम में किसी भी प्रकार का बदलाव न किया जाए। महासंघ का कहना है कि जब तक पुरानी व्यवस्था के तहत भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।