विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस: अभिव्यक्ति की आज़ादी और पत्रकारों की सुरक्षा पर उठे सवाल

बीबीएन, 2 मई (कविता शांति गौतम): विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मीडिया काउंसिल ऑफ जर्नलिस्ट्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय राठी ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र की आत्मा है और इसके बिना लोकतंत्र अधूरा है।

संजय राठी ने कहा कि वर्तमान समय में प्रेस की स्वतंत्रता कई चुनौतियों का सामना कर रही है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चिंता का विषय है। रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स द्वारा जारी विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक 2026 में भारत का 157वां स्थान इस बात का संकेत है कि पत्रकारों के लिए कार्य परिस्थितियां कठिन होती जा रही हैं।

उन्होंने बताया कि यूनेस्को के अनुसार वर्ष 2024 में 68 पत्रकारों की जान गई, जबकि कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स के अनुसार वर्ष 2025 में यह संख्या 129 रही। उन्होंने कहा कि कई मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न होना भी एक गंभीर समस्या है।

राठी ने कहा कि देश में पत्रकारों को धमकियों, हमलों और झूठे मामलों का सामना करना पड़ रहा है, खासकर जमीनी स्तर पर काम करने वाले पत्रकार अधिक प्रभावित होते हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर संकेत बताया।

उन्होंने सरकार से मांग की कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानून बनाए जाएं और ऐसे मामलों में त्वरित व निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही मीडिया से अपील की कि वह निष्पक्ष, तथ्यपरक और जनहित में काम करने वाली पत्रकारिता को प्राथमिकता दे।

उन्होंने कहा कि विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस केवल एक दिन नहीं, बल्कि यह संकल्प लेने का अवसर है कि प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा की जाए और सुरक्षित व जिम्मेदार मीडिया वातावरण सुनिश्चित किया जाए।

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