2 मई: प्रदेश में सरकारी कार्यालयों में बिजली खपत को नियंत्रित करने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। पुनर्निर्मित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत अब 29 हजार से अधिक सरकारी दफ्तरों में स्मार्ट बिजली मीटरों को प्रीपेड प्रणाली में बदल दिया गया है। इसके बाद अब कार्यालयों में बिजली उपयोग के लिए मोबाइल की तरह पहले रिचार्ज करना होगा।
बिजली बोर्ड ने इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया और शुरुआत अपने ही कार्यालयों से की। प्रारंभिक चरण में करीब 1500 दफ्तरों में यह सुविधा लागू की गई थी, जिसके बाद अब इसे पूरे प्रदेश के सरकारी संस्थानों में लागू कर दिया गया है।
नई प्रणाली के तहत रियल टाइम निगरानी, ऑनलाइन रिचार्ज, दैनिक खपत का रिकॉर्ड और अलर्ट जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इससे विभागों को बिजली उपयोग का सटीक आंकड़ा मिलेगा और अनावश्यक खपत पर रोक लगेगी।
सरकार का मानना है कि पहले दफ्तरों में काम खत्म होने के बाद भी बिजली उपकरण चालू रहने से काफी बर्बादी होती थी। अब स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगने से हर यूनिट की डिजिटल निगरानी संभव होगी, जिससे विभाग अपनी जरूरत और बजट के अनुसार बिजली का उपयोग कर सकेंगे।
बिजली बोर्ड के मुख्य अभियंता ई. राकेश कुमार के अनुसार, इस व्यवस्था के लागू होने से न केवल बिजली बिलों में कमी आएगी, बल्कि राजस्व प्रबंधन भी मजबूत होगा और बकाया बिलों की समस्या खत्म होगी।