27 अप्रैल: हिमाचल प्रदेश में वन्य जीवों की तस्करी और अन्य वन अपराधों पर सख्ती बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है। इन अपराधों से जुड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ करने के लिए वन विभाग अब एक विशेष साइबर सेल स्थापित करने जा रहा है।
प्रदेश वन मुख्यालय में बनने वाले इस साइबर सेल के जरिए वन अपराधों की तकनीकी जांच को मजबूत किया जाएगा। विभाग ने इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर सरकार की मंजूरी के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न वन सर्किलों से सुझाव मिले थे कि मौजूदा समय में वन अधिकारियों के पास आईटी एक्ट के तहत जांच की पर्याप्त शक्तियां नहीं हैं। कई मामलों में लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), इंटरनेट और मोबाइल टॉवर डेटा प्राप्त करने में दिक्कत आती है।
इन्हीं चुनौतियों को देखते हुए अब साइबर सेल बनाने का फैसला लिया गया है, जिसमें कुछ अधिकारियों को तकनीकी जांच के विशेष अधिकार भी दिए जाने का प्रस्ताव है।
प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट डॉ. संजय सूद ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि मंजूरी मिलने के बाद विभाग स्वयं वन्य जीव अपराधों की तकनीकी जांच करने में सक्षम होगा।
हिमाचल प्रदेश जैव विविधता से भरपूर राज्य है, जहां तेंदुआ, हिम तेंदुआ, कस्तूरी मृग, भालू और मोनाल जैसे दुर्लभ वन्य जीव पाए जाते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।