रक्कड़ धर्मशाला से ‘मिशन भरपूर 2.0’ का शुभारंभ, कुपोषण से लड़ने को बच्चों को मिलेंगे पोषण उत्पाद

7 अक्तूबर: बच्चों में कुपोषण की रोकथाम और उनके समुचित शारीरिक एवं मानसिक विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास विभाग तथा जिला प्रशासन कांगड़ा के सहयोग से रक्कड़, धर्मशाला में ‘मिशन भरपूर 2.0’ का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत कर मिशन का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर उपायुक्त हेमराज बैरवा ने कहा कि स्वस्थ बच्चे ही स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समाज और मजबूत राष्ट्र की आधारशिला हैं। आज के बच्चे देश की आने वाली पीढ़ी हैं और यदि उन्हें बचपन से ही उचित पोषण, स्वास्थ्य सुविधाएं और बेहतर वातावरण मिले तो वे आगे चलकर समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि बच्चों का पोषण केवल सरकार या किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि माता-पिता और परिवार की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। बदलती जीवनशैली और एकल परिवारों की बढ़ती संख्या के कारण कई बार बच्चों को समुचित समय और व्यक्तिगत ध्यान नहीं मिल पाता। ऐसे में वैज्ञानिक अनुसंधान और पारंपरिक पोषण पद्धतियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।

उपायुक्त ने कहा कि ‘मिशन भरपूर’ इसी दिशा में एक अभिनव पहल है, जिसके तहत बच्चों को स्वादिष्ट और पोषणयुक्त सप्लीमेंट्री उत्पाद उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये उत्पाद बच्चों के मुख्य भोजन का विकल्प नहीं, बल्कि पूरक आहार हैं। बच्चों को घर पर संतुलित एवं पौष्टिक भोजन देने के साथ इन उत्पादों का निर्धारित तरीके से उपयोग किया जाना चाहिए।

उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को पर्याप्त समय देने और मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग को कम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि बच्चों के साथ खेलना, बातचीत करना, उन्हें बाहर घुमाना और उनकी गतिविधियों पर ध्यान देना उनके शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास के लिए बेहद जरूरी है। अभिभावकों को बच्चों के विकासात्मक पड़ावों पर भी नियमित रूप से नजर रखनी चाहिए।

हेमराज बैरवा ने मदर एंड चाइल्ड प्रोटेक्शन (एमसीपी) कार्ड के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इसमें बच्चे के पोषण, स्वास्थ्य और विकास से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध होती है। अभिभावकों को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा दी जाने वाली जानकारी को गंभीरता से लेना चाहिए तथा बच्चे के विकास में किसी प्रकार की कमी या देरी दिखाई देने पर समय रहते विशेषज्ञों की सलाह लेनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि बच्चों को ध्यान में रखते हुए इन पोषण उत्पादों को इस प्रकार तैयार किया गया है कि वे उन्हें आसानी और रुचि के साथ ग्रहण कर सकें। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और अभिभावकों से उत्पादों का उचित संरक्षण और निर्धारित तरीके से उपयोग सुनिश्चित करने का आग्रह किया, ताकि बच्चों को इनका पूरा पोषण लाभ मिल सके।

सीएसआईआर-आईएचबीटी के निदेशक सुदेश यादव ने बताया कि संस्थान द्वारा बच्चों के लिए ऐसे पोषण उत्पाद विकसित किए गए हैं, जिनमें आयरन, जिंक, कैल्शियम, प्रोटीन सहित विभिन्न आवश्यक पोषक तत्व वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप शामिल किए गए हैं। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक चरण में इन उत्पादों का उपयोग 2 से 5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के बीच किया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। इन परिणामों के आधार पर अब इस पहल को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सीएसआईआर-आईएचबीटी की वैज्ञानिक टीम मिशन के क्रियान्वयन में आवश्यक तकनीकी सहयोग उपलब्ध करवाएगी। जमीनी स्तर पर किसी प्रकार की आवश्यकता या कमी सामने आने पर विभाग और वैज्ञानिक टीम को अवगत करवाने का आग्रह किया गया, ताकि आवश्यक सुधार और सहयोग उपलब्ध करवाया जा सके।

जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला एवं बाल विकास अशोक शर्मा ने बताया कि ‘मिशन भरपूर’ के पहले चरण में 2 से 5 वर्ष आयु वर्ग के कुपोषित एवं अति-कुपोषित बच्चों को वैज्ञानिक रूप से विकसित पोषण उत्पाद उपलब्ध करवाए गए थे। इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए तथा बच्चों के पोषण स्तर और स्वास्थ्य मानकों में सुधार दर्ज किया गया। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए अब 2 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए भी उपयुक्त पोषण उत्पाद उपलब्ध करवाने की दिशा में कार्य किया गया है।

कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त ने बच्चों के लिए वैज्ञानिक रूप से तैयार पौष्टिक उत्पादों का वितरण किया और अभिभावकों को इनके उचित उपयोग के संबंध में जागरूक किया।

इस अवसर पर सीएसआईआर-आईएचबीटी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. महेश, वैज्ञानिक डॉ. विद्याशंकर, पंचायत प्रतिनिधि, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

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