6 अक्तूबर: जिले में विकास परियोजनाओं को गति देने और वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) के तहत लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के लिए मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय के वीडियो कॉन्फ्रेंस हॉल में उपायुक्त अपूर्व देवगन की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न विभागों से संबंधित एफसीए प्रस्तावों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
उपायुक्त ने बताया कि जिले में वन संरक्षण अधिनियम के तहत अब तक 38 मामलों को स्वीकृति मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि जनहित और विकास परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब को कम करने के लिए एफसीए प्रस्तावों का समयबद्ध निस्तारण जरूरी है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को वन भूमि हस्तांतरण से जुड़ी सभी औपचारिकताएं प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरी करने के निर्देश दिए, ताकि विकास कार्य निर्धारित समय सीमा में पूरे किए जा सकें।
अपूर्व देवगन ने कहा कि वन भूमि से जुड़े सभी मामलों का निपटारा निर्धारित नियमों और समय-सीमा के अनुसार किया जाए। विभाग विभिन्न परियोजनाओं से संबंधित प्रस्ताव पूर्ण दस्तावेजों के साथ समय पर प्रस्तुत करें, ताकि स्वीकृति प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न हो। उन्होंने विभागों के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने और लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी दिए।
उपायुक्त ने जिले के सभी डीएफओ को ड्रैजिंग से संबंधित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने और संबंधित कार्यों को शीघ्र पूरा करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में आवश्यक औपचारिकताएं समय पर पूरी की जाएं, ताकि संबंधित विकास एवं पुनर्स्थापन कार्यों में तेजी लाई जा सके।
बैठक का संचालन एसीएफ (मुख्यालय) नवजोत ने किया। उन्होंने जिले में लंबित एफसीए प्रस्तावों की वर्तमान स्थिति, प्रगति और विभिन्न परियोजनाओं से जुड़े मामलों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।
बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त प्रियांशु खाती, डीएफओ मंडी संजीव शर्मा सहित लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं, एसीएफ सुकेत, डीएफओ नाचन, जोगिंद्रनगर और करसोग सहित संबंधित विभागों के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में जुड़े।