1 अक्तूबर : किन्नौर जिले के सांगला और शिमला जिले के डोडरा-क्वार के बीच स्थित रूपिन दर्रा क्षेत्र में 26 सितंबर को हुई भारी बर्फबारी के बाद 2,000 से अधिक भेड़-बकरियों के बर्फ के नीचे दबने की आशंका जताई गई है। चरवाहों के अनुसार, बड़ी संख्या में उनके पशु बर्फ में दब गए हैं।
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि शुरुआती अनुमान के अनुसार करीब 2,000 पशु रूपिन दर्रे के ऊंचाई वाले क्षेत्र में फंसे हुए हैं। हालांकि, वास्तविक नुकसान का आकलन बर्फ पिघलने के बाद ही हो सकेगा, जब प्रभावित क्षेत्र में पशुओं की पूरी गिनती की जा सकेगी।
उन्होंने बताया कि किन्नौर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हाल में भारी बारिश और बर्फबारी हुई। उस दौरान चरवाहे अपने पशुओं के साथ सर्दियों के लिए निचले क्षेत्रों की ओर लौट रहे थे। रूपिन दर्रा पार करते समय अचानक भारी बर्फबारी शुरू होने से कई पशु आगे नहीं बढ़ सके और बर्फ में फंस गए।
घटना की जानकारी मिलने के बाद राजस्व मंत्री ने डोडरा-क्वार के एसडीएम को बचाव दल गठित करने के निर्देश दिए। इसके बाद स्थानीय चरवाहों, होमगार्ड, पुलिस और राजस्व विभाग के कर्मचारियों को शामिल कर टीम बनाई गई। यह टीम बुधवार को रूपिन दर्रे के सबसे ऊंचे स्थान तक पहुंची और सैटेलाइट फोन के माध्यम से प्रशासन के संपर्क में है।
मंत्री के अनुसार, क्षेत्र में तीन फीट से अधिक बर्फ जमा है। बर्फ के बीच कुछ बड़े पशुओं के केवल सींग दिखाई दे रहे हैं, जबकि भेड़-बकरियों की वास्तविक स्थिति का अभी पता नहीं चल पाया है।
घटना में किसी व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। बर्फबारी शुरू होने पर कुछ चरवाहे वापस लौट आए थे, लेकिन जो पहले ही रूपिन दर्रा पार कर चुके थे, उनके लिए वापस आना संभव नहीं था। भारी बर्फबारी के कारण पशु भी आगे नहीं बढ़ सके और वहीं फंस गए।
बचाव दल मौके पर हालात का जायजा ले रहा है। राजस्व मंत्री ने कहा कि नुकसान का विस्तृत आकलन करने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों की एक और टीम जल्द भेजी जाएगी। सटीक नुकसान सामने आने के बाद प्रभावित चरवाहों को राहत सहायता उपलब्ध करवाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सरकार विशेष राहत पैकेज के माध्यम से भी प्रभावित लोगों की मदद करने का प्रयास करेगी।