25 सितंबर, कविता शान्ति गौतम : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के पैतृक गांव मंगोली जट्टान में दलित ग्रामीण नायब सिंह के करीब 50 वर्ष पुराने मकान को प्रशासन की ओर से तोड़े जाने के मामले ने सवाल खड़े कर दिए हैं। नायब सिंह का आरोप है कि उसने गांव की समस्याओं को मीडिया के सामने उठाया था, जिसके बाद उसके खिलाफ कार्रवाई की गई।
नायब सिंह के अनुसार, उसने गांव की समस्याओं के साथ मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के परिवार से जुड़ी कुछ बातें भी मीडिया के सामने रखी थीं। उसने दावा किया था कि मुख्यमंत्री का परिवार करीब 50-60 वर्ष पहले गांव छोड़कर चला गया था और उस समय उनके पास करीब डेढ़ एकड़ जमीन थी, जिसे बेचकर वे बाहर चले गए थे। ग्रामीण ने आगे कुछ जमीन, कोठी, स्टोन क्रशर और डंपरों आदि को लेकर भी दावे किए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से कोई प्रमाणिक पुष्टि नहीं हो पाई है।
नायब सिंह का आरोप है कि कार्रवाई से पहले कैलाश सैनी, जिन्हें वह मुख्यमंत्री का प्रतिनिधि बताते हैं, उसके पास आए और उसे डराने की कोशिश की। इसके बाद उसके ठिकाने पर बुलडोजर पहुंचा और कार्रवाई कर दी गई।
नायब सिंह के मुताबिक, वह स्थान पशु बांधने और सामान रखने के लिए इस्तेमाल होता था। उसका कहना है कि गांव में कई अन्य स्थान भी हैं, जिनका लोग पिछले 50-60 वर्षों से इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में उसका सवाल है कि कार्रवाई केवल उसके खिलाफ ही क्यों की गई।
नायब सिंह ने कहा, “मेरा क्या कसूर है? क्या मैं दलित हूं, इसलिए मेरे साथ ऐसा हुआ? या मैंने गांव की सच्चाई मीडिया के सामने बताई, इसलिए मेरे खिलाफ कार्रवाई की गई?” उसने सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग की है।
मामले में प्रशासन का पक्ष जानने के लिए संबंधित कार्यालय में संपर्क किया गया, लेकिन बीडीपीओ और ग्राम सचिव राजेश कार्यालय में मौजूद नहीं मिले। फोन पर ग्राम सचिव राजेश ने इसे प्रशासनिक कार्रवाई बताते हुए कहा कि उक्त स्थान पर भवन निर्माण किया जाना है, इसलिए कार्रवाई की गई।
नोटिस और कार्रवाई के आदेश के संबंध में पूछे जाने पर ग्राम सचिव ने बताया कि कोई लिखित नोटिस नहीं दिया गया था, बल्कि चौकीदार को भेजा गया था। उन्होंने कार्रवाई को नियमों के अनुसार बताया और शिकायत करने की बात कहते हुए फोन काट दिया।
अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि पंचायत की जमीन से अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई की गई है, तो क्या ऐसे अन्य स्थानों पर भी इसी तरह की कार्रवाई होगी? साथ ही, ग्रामीण द्वारा लगाए गए आरोपों और कार्रवाई के बीच किसी संबंध के दावे की भी निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है।