27 अगस्त: हिमाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्प को नई पहचान मिली है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के हिमाचल प्रदेश क्षेत्रीय कार्यालय के निरंतर प्रयासों से प्रदेश के तीन प्रमुख पारंपरिक उत्पादों को भौगोलिक संकेतक (जीआई) का दर्जा प्राप्त हुआ है। इस उपलब्धि के अवसर पर राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने लोक भवन में आयोजित समारोह के दौरान संबंधित कारीगरों को जीआई पंजीकरण प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
जीआई का दर्जा पाने वाले तीन पारंपरिक उत्पादों में हिमाचल का प्रसिद्ध पारंपरिक वाद्ययंत्र रणसिंघा, स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार किया जाने वाला हिमाचल हस्तनिर्मित गलीचा तथा लकड़ी पर बारीक नक्काशी की पारंपरिक कला हिमाचल काष्ठ नक्काशी शिल्प शामिल हैं। इन उत्पादों को जीआई पहचान मिलने से प्रदेश की पारंपरिक कला और शिल्प को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
समारोह में नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डॉ. विवेक पठानिया ने कहा कि जीआई टैग हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे स्थानीय कारीगरों की आजीविका को मजबूती मिलेगी और उनके उत्पादों के लिए देश-विदेश में बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि नाबार्ड भविष्य में भी ब्रांडिंग, मार्केट लिंकेज और क्षमता निर्माण के माध्यम से उत्पादक समूहों और कारीगरों को सहयोग देता रहेगा। इस अवसर पर नाबार्ड के उप महाप्रबंधक कुशल दीप, सहायक प्रबंधक हिमांशु बालियान सहित विभिन्न कारीगर समुदायों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।