11 अगस्त: जिला कांगड़ा के जवाली उपमंडल के भरमाड़ गांव में स्थित शिब्बोथान धाम क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा यह प्राचीन धाम लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का केंद्र बना हुआ है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु धार्मिक वातावरण के साथ शांत और सकारात्मक अनुभूति का अनुभव करते हैं।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार शिब्बोथान धाम एक प्राचीन सिद्धपीठ है। मान्यता है कि इस पवित्र स्थल पर ऋषि-मुनियों और साधु-संतों ने तपस्या की थी, जिसके कारण इसे विशेष आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है। भगवान शिव से जुड़ी आस्था के चलते श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं।
शिब्बोथान धाम की एक प्रमुख स्थानीय मान्यता सर्पदंश से भी जुड़ी हुई है। आसपास के क्षेत्रों में लंबे समय से ऐसी परंपरा रही है कि सर्पदंश से प्रभावित लोगों को धाम में लाकर धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा करवाई जाती है। हालांकि, सर्पदंश की स्थिति में यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि धार्मिक आस्था के साथ तत्काल चिकित्सकीय उपचार भी लिया जाए, क्योंकि सर्पदंश एक गंभीर चिकित्सा आपात स्थिति हो सकती है।
धाम का शांत वातावरण, चारों ओर फैली हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता इसकी धार्मिक महत्ता को और बढ़ा देती है। सावन मास, महाशिवरात्रि सहित विभिन्न धार्मिक अवसरों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इन दिनों पूरा क्षेत्र शिवभक्ति और धार्मिक गतिविधियों से भक्तिमय हो जाता है।
जुलाई और अगस्त के दौरान शिब्बोथान धाम में आयोजित होने वाले मेलों में कांगड़ा के अलावा हिमाचल प्रदेश के अन्य जिलों और पड़ोसी राज्यों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-अर्चना के साथ इन मेलों में स्थानीय संस्कृति, लोक परंपराओं और ग्रामीण जीवन की झलक भी देखने को मिलती है।
शिब्बोथान धाम धार्मिक आस्था के साथ-साथ हिमाचल की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं का भी महत्वपूर्ण प्रतीक है। यह पावन स्थल वर्षों से लोगों को अपनी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य कर रहा है। प्राकृतिक सौंदर्य और धार्मिक महत्व के कारण यह धाम क्षेत्र में आध्यात्मिक पर्यटन की संभावनाओं को भी मजबूत करता है।