6 अगस्त: जिला कांगड़ा में मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत अनाथ, निराश्रित, परित्यक्त और उपेक्षित 746 बच्चों के कल्याण पर गत वित्त वर्ष के दौरान 7.33 करोड़ रुपये खर्च किए गए। यह जानकारी उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा ने महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए दी।
उपायुक्त ने बताया कि विभाग समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के अंतर्गत सामाजिक सुरक्षा के लिए 90.91 लाख रुपये, गृह निर्माण के लिए 2.94 करोड़ रुपये, विवाह अनुदान के रूप में 2.56 करोड़ रुपये, उच्च शिक्षा के लिए 48.85 लाख रुपये, प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग के लिए 4.43 लाख रुपये तथा स्वरोजगार के लिए 39.20 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई।
इसके अलावा मिशन वात्सल्य के तहत 6024 पात्र लाभार्थियों के लिए 1.73 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जबकि संस्थागत देखभाल में रह रहे 209 बच्चों के पॉकेट मनी, त्योहार, वस्त्र और पोषण पर 19 लाख रुपये खर्च किए गए। वहीं इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना के तहत 0 से 18 वर्ष आयु वर्ग के 5163 बच्चों को 3.02 करोड़ रुपये की सहायता राशि प्रदान की गई।
उपायुक्त ने प्रतिभाशाली एवं असहाय बच्चों की पहचान कर उनकी शिक्षा और प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए सरकारी योजनाओं के साथ-साथ स्वयंसेवी संस्थाओं का सहयोग लेने के निर्देश भी दिए।
बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी अशोक शर्मा ने आंगनवाड़ी सेवाओं, पोषण अभियान, प्री-स्कूल शिक्षा और पोषण ट्रैकर की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। उपायुक्त ने सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार और चिन्हित चुनौतियों के समयबद्ध समाधान के निर्देश दिए।