31 जुलाई: वित्तीय संकट से जूझ रहे बघाट अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक को संकट से बाहर निकालने के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। सरकार ने बैंक के पुनर्जीवन के लिए तैयार की गई योजना भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को भेज दी है। इसी दिशा में प्रदेश सरकार बैंक को 20 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता भी उपलब्ध करवा चुकी है।
बैंक की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए ऋण वसूली अभियान को भी तेज किया गया है। सहायक पंजीयक (एआरसीएस) की अदालत से अब तक 100 से अधिक डिफॉल्टरों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए जा चुके हैं। आने वाले दिनों में यह संख्या 250 से अधिक होने की संभावना है। बैंक प्रबंधन और सहकारिता विभाग की ओर से डिफॉल्टरों से बकाया राशि वसूलने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है।
अब तक करीब 20 डिफॉल्टरों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनसे लगभग 45 लाख रुपये की वसूली हुई है। इसके अलावा ओच्छघाट के समीप एक डिफॉल्टर की जब्त जमीन को 12.50 लाख रुपये में नीलाम किया गया है। इस राशि को मिलाकर बैंक करीब 57 लाख रुपये की रिकवरी कर चुका है।
वर्तमान में बैंक की नेटवर्थ करीब 26 करोड़ रुपये माइनस में पहुंच गई है। एआरसीएस सोलन गिरीश नड्डा ने कहा कि डिफॉल्टरों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। बकाया राशि की वसूली के लिए गिरफ्तारी वारंट जारी करने के साथ-साथ संपत्तियों की नीलामी समेत सभी कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल किया जाएगा।
जून में आरबीआई ने सहकारिता विभाग को पत्र भेजकर बैंक का लाइसेंस रद्द करने और उसे लिक्विडेट करने का सुझाव दिया था। आरबीआई ने 31 जुलाई तक बैंक की स्थिति स्पष्ट करने को कहा था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने बैंक को बंद होने से बचाने के लिए पुनर्जीवन योजना तैयार करने की प्रक्रिया तेज की।
सहकारिता विभाग के अनुसार बैंक को मजबूत स्थिति में लाने के लिए करीब 20 से 25 करोड़ रुपये की आवश्यकता थी। सरकार की ओर से 15 से 20 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाने की तैयारी थी, जबकि बाकी राशि शेयरधारकों और खाताधारकों के सहयोग से जुटाने की योजना बनाई गई थी। इसी क्रम में सरकार ने बैंक को 20 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध करवा दी है।