पालना योजना बनी कामकाजी माताओं का सहारा, बच्चों को मिला सुरक्षित और बेहतर भविष्य

30 जुलाई: कामकाजी महिलाओं के लिए छोटे बच्चों की देखभाल हमेशा बड़ी चुनौती रही है। इसी समस्या का समाधान करने के उद्देश्य से हिमाचल प्रदेश सरकार मिशन शक्ति के तहत पालना योजना का प्रभावी संचालन कर रही है। इस योजना के अंतर्गत संचालित आंगनबाड़ी-सह-क्रेच केंद्र महिलाओं को निश्चिंत होकर रोजगार, स्वरोजगार, शिक्षा और अन्य कार्यों से जुड़ने का अवसर प्रदान कर रहे हैं, जबकि बच्चों को सुरक्षित वातावरण, पौष्टिक आहार और प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।

मंडी सदर के दरमियाना स्थित आंगनबाड़ी-सह-क्रेच केंद्र इस योजना की सफलता का उदाहरण बनकर उभरा है। यहां वर्तमान में 24 बच्चों की सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक देखभाल की जाती है। छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों को पौष्टिक भोजन, स्वास्थ्य निगरानी, खेल-खेल में शिक्षा और सुरक्षित माहौल जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।

इस केंद्र का लाभ उठाने वाली कई महिलाओं ने बताया कि पहले बच्चों की देखभाल को लेकर उन्हें काफी चिंता रहती थी। बिलासपुर की छायावंती ने बताया कि मजदूरी पर जाते समय बच्चों को सुरक्षित छोड़ने की परेशानी रहती थी, लेकिन अब वे दोनों बच्चों को क्रेच में छोड़कर निश्चिंत होकर काम कर पाती हैं। मंडी की सुजाता वालिया ने कहा कि अब वे अपनी दो वर्षीय बेटी को केंद्र में छोड़कर आराम से नौकरी कर रही हैं। वहीं वंदना ठाकुर ने बताया कि क्रेच सुविधा मिलने से वे पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर पूरा ध्यान दे पा रही हैं। सैलून संचालिका रेनू ठाकुर ने भी योजना को कामकाजी महिलाओं के लिए बेहद राहतभरा कदम बताया।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मीनाक्षी ने बताया कि पालना योजना के तहत अब छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों को भी केंद्र में रखा जा रहा है। बच्चों को सुबह का नाश्ता, दोपहर का भोजन, फल और शाम के स्नैक्स के साथ नियमित स्वास्थ्य जांच तथा खेल-आधारित शिक्षा भी दी जाती है। क्रेच कार्यकर्ता पूर्णिमा राणा ने बताया कि बच्चों के शारीरिक विकास की हर माह निगरानी की जाती है, जबकि सहायिका फुलमु देवी बच्चों की दैनिक जरूरतों का विशेष ध्यान रखती हैं।

जिला कार्यक्रम अधिकारी (महिला एवं बाल विकास) अजय बद्रेल के अनुसार मंडी जिले में वर्तमान में पालना योजना के तहत 10 आंगनबाड़ी-सह-क्रेच केंद्र संचालित हैं। इनमें मंडी सदर, सुंदरनगर, रिवालसर, द्रंग और सरकाघाट क्षेत्र शामिल हैं। अधिक से अधिक महिलाओं तक इस सुविधा का लाभ पहुंचाने के लिए विभाग ने 12 नए क्रेच केंद्र खोलने का प्रस्ताव भी सरकार को भेजा है।

पालना योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ बच्चों के सुरक्षित और समग्र विकास में भी अहम भूमिका निभा रही है। मंडी जिले में इस योजना के प्रति बढ़ता भरोसा इसकी सफलता और उपयोगिता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

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