14 जून : राजधानी दिल्ली की एक अदालत में तलाक मामले की सुनवाई के दौरान एक भावुक और अप्रत्याशित घटनाक्रम देखने को मिला। करीब पांच वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे पति-पत्नी ने अदालत में ही अपने मतभेद भुलाकर साथ रहने का फैसला कर लिया।
जानकारी के अनुसार वर्ष 2020 में विवाह बंधन में बंधे शिखा और सौरभ के रिश्ते में समय के साथ विवाद बढ़ते गए, जिसके बाद मामला अदालत तक पहुंच गया। पिछले कई वर्षों से दोनों के बीच तलाक को लेकर कानूनी प्रक्रिया चल रही थी।
बताया जा रहा है कि हाल ही में शिखा के पिता की तबीयत बिगड़ने पर सौरभ ने आगे बढ़कर उनकी मदद की और बेहतर उपचार की व्यवस्था करवाने में सहयोग किया। इस घटना के बाद दोनों परिवारों के बीच संवाद का माहौल बनने लगा।
अदालत में सुनवाई के दौरान जब दोनों पक्ष मौजूद थे, तब परिस्थितियां अचानक बदल गईं। भावुक माहौल के बीच दोनों ने अपने रिश्ते को एक और मौका देने का निर्णय लिया। पत्नी ने तलाक से जुड़े दस्तावेज वापस लेने की इच्छा जताई और दोनों ने साथ रहने पर सहमति व्यक्त की।
इस घटनाक्रम के बाद अदालत में मौजूद लोगों ने भी इसे रिश्तों में संवाद, समझदारी और संवेदनशीलता की एक सकारात्मक मिसाल बताया। वर्षों से चल रहा विवाद आपसी सहमति और भावनात्मक समझ के साथ समाप्त हो गया।