1 मई: ठियोग में जल संकट के दौरान टैंकरों के जरिए पानी सप्लाई में बड़े घोटाले का मामला सामने आया है। करीब 1.13 करोड़ रुपये के इस कथित घोटाले में विजिलेंस ने जांच पूरी कर नौ अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों के खिलाफ अदालत में चालान पेश कर दिया है।
जांच में खुलासा हुआ कि जिन टैंकरों से पानी सप्लाई दिखाया गया, उनके रजिस्ट्रेशन नंबर असल में स्कूटर, मोटरसाइकिल और कारों के थे। इतना ही नहीं, जिन गांवों तक सड़क मार्ग ही नहीं है, वहां भी टैंकरों से पानी पहुंचाने के फर्जी बिल बनाए गए।
मामले में यह भी सामने आया कि बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए चुनिंदा ठेकेदारों को काम दिया गया। टेंडर शर्तों के मुताबिक लेलू पुल से पानी भरना था, लेकिन ठेकेदारों ने नालों से पानी भरकर सप्लाई की।
विजिलेंस ने जल शक्ति विभाग के जूनियर इंजीनियर, लिपिक समेत कई अधिकारियों और ठेकेदारों को आरोपी बनाया है। आरोप है कि फर्जी बिल तैयार कर बिना भौतिक सत्यापन के भुगतान कर दिया गया।
इस मामले में करीब 120 लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। शुरुआती जांच के बाद 10 अधिकारियों को निलंबित किया गया था, जबकि संबंधित ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने के आदेश भी दिए गए हैं।
गौरतलब है कि इस घोटाले का खुलासा पूर्व विधायक राकेश सिंघा ने आरटीआई के माध्यम से किया था, जिसके बाद विजिलेंस जांच शुरू हुई।