27 अक्तूबर, कविता शान्ति गौतम : केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की सितंबर 2026 की ड्रग अलर्ट रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश के दवा निर्माताओं से संबंधित 92 दवाओं के नमूने निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। इस रिपोर्ट में देशभर से कुल 330 दवाओं के नमूने मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाए गए हैं। हिमाचल प्रदेश ड्रग्स कंट्रोल प्रशासन के स्टेट ड्रग्स कंट्रोलर डॉ. मनीष कपूर ने मरीजों और आम जनता से अपील की है कि वे रिपोर्ट में मानक गुणवत्ता पर खरे नहीं उतरने वाली घोषित दवाओं का इस्तेमाल न करें।
रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल प्रदेश से संबंधित 92 नमूनों में से 70 दवाओं के नमूने निर्धारित मात्रा (असे) और दवा के घुलने की क्षमता (डिसॉल्यूशन) से जुड़े मानकों पर खरे नहीं उतरे, जबकि 22 नमूनों में लेबलिंग सहित अन्य खामियां पाई गईं। सीडीएससीओ ने यह रिपोर्ट अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी की है।
ड्रग्स कंट्रोल प्रशासन ने लोगों से आग्रह किया है कि वे ड्रग अलर्ट में शामिल दवाओं की जानकारी पर ध्यान दें और संबंधित दवाओं के उपयोग को लेकर चिकित्सक या फार्मासिस्ट से परामर्श लें। डॉ. कपूर ने कहा कि दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। यदि किसी दवा की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो, तो संबंधित स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें और संदिग्ध दवा की जानकारी औषधि नियामक प्राधिकरण को दें।
हिमाचल प्रदेश देश के प्रमुख फार्मास्युटिकल विनिर्माण केंद्रों में शामिल है। राज्य देश की घरेलू दवा आपूर्ति में लगभग 33 प्रतिशत योगदान देता है। इसके अलावा, यहां से बड़ी मात्रा में दवा फॉर्मूलेशन का निर्यात भी किया जाता है। ऐसे में दवाओं की गुणवत्ता बनाए रखना और औषधि निर्माण से जुड़े नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण है। गुणवत्ता मानकों में कमी मरीजों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए चिंता का विषय हो सकती है।
स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंहमार, आईएएस ने राज्य में औषधि कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन और दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ड्रग्स कंट्रोल प्रशासन को सहयोग प्रदान किया है। प्रशासन दवा निर्माताओं द्वारा निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने और नियामक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रयासरत है।