7 मई : हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड कक्षा 9वीं और 10वीं की परीक्षाओं में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने बताया कि परीक्षा प्रणाली और प्रश्न पत्रों को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से धर्मशाला में तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इस पहल का उद्देश्य छात्रों की मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाना है।
बोर्ड की नई व्यवस्था के अनुसार अब प्रश्न पत्रों में 20 से 30 प्रतिशत प्रश्न क्षमता और समझ आधारित होंगे। यानी केवल रटकर पढ़ाई करने से अच्छे अंक हासिल करना आसान नहीं होगा। छात्रों को विषय को गहराई से समझना होगा और यह जानना होगा कि सीखी गई जानकारी का व्यवहारिक जीवन में किस प्रकार उपयोग किया जा सकता है।
इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में रटने की प्रवृत्ति को कम करना और सोचने-समझने की क्षमता को बढ़ावा देना है। बोर्ड का मानना है कि इससे छात्रों की तार्किक और विश्लेषणात्मक सोच मजबूत होगी।
कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों ने हिमाचल बोर्ड के प्रश्न पत्रों की तुलना सीबीएसई और आईसीएसई जैसे राष्ट्रीय स्तर के बोर्डों से भी की। इसमें सिलेबस, ब्लूप्रिंट और मार्किंग स्कीम का विस्तृत अध्ययन किया गया। इससे हिमाचल बोर्ड के विद्यार्थियों को नीट और जेईई जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी मदद मिलेगी।
बोर्ड अध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि शिक्षा को आधुनिक और व्यवहारिक बनाना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि नए पैटर्न के जरिए छात्रों का केवल शैक्षणिक नहीं बल्कि बौद्धिक विकास भी सुनिश्चित किया जाएगा, ताकि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकें।