हिमाचल बना ई-पंचायत प्रोसिडिंग सिस्टम पोर्टल लॉन्च करने वाला देश का पहला राज्य

25 सितंबर: हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासनिक संस्थान (MSHIPA) में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) एवं ग्रामीण विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं को लेकर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय स्तरीय ओरिएंटेशन कार्यशाला का शुभारंभ ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने किया। इस अवसर पर उन्होंने स्वच्छ भारत मिशन के तहत बेस्ट प्रैक्टिसेज पर आधारित मैगजीन का विमोचन करने के साथ हिम ई-पंचायत प्रोसिडिंग सिस्टम पोर्टल भी लॉन्च किया।

अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने हिम ई-पंचायत प्रोसिडिंग सिस्टम पोर्टल लॉन्च किया है। इसके माध्यम से पंचायतों, पंचायत समितियों (बीडीसी) और जिला परिषदों की बैठकों की कार्यवाही ऑनलाइन की जाएगी। इससे बैठकों की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित एवं व्यवस्थित रहेगा।

उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को योजनाओं तथा उनके नियमों की स्पष्ट जानकारी होना आवश्यक है। नियमों की जानकारी और अनुपालना में कमी के कारण कई बार बजट का समुचित उपयोग नहीं हो पाता तथा पंचायतों के निर्णयों को लेकर विवाद और न्यायालयीन मामले भी सामने आते हैं। ई-पंचायत सिस्टम से बैठकों की कार्यवाही निर्धारित नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश का करीब 90 प्रतिशत क्षेत्र ग्रामीण है और ग्रामीण विकास की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग पर है। सरकार तकनीक के माध्यम से विभागीय कार्यों में पारदर्शिता और गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। पोर्टल पर पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक के अधिकारी जुड़ सकेंगे और हिम एक्सेस के माध्यम से लॉगिन की सुविधा मिलेगी।

उन्होंने बताया कि पोर्टल पर पंचायत, बीडीसी और जिला परिषद की बैठकों का एजेंडा, बैठक का विवरण और प्रोसिडिंग ऑनलाइन अपडेट की जा सकेगी। प्रधान, उपप्रधान, वार्ड सदस्यों और ग्राम सभा सदस्यों की उपस्थिति भी ऑनलाइन दर्ज होगी। बैठक के लिए आवश्यक कोरम की स्थिति निर्धारित करने के साथ कार्यवाही तैयार होने के बाद ई-हस्ताक्षर की सुविधा भी उपलब्ध होगी।

ई-पंचायत पोर्टल को पंचायती राज विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से भी जोड़ा जाएगा, जिससे भविष्य में आम नागरिक किसी भी पंचायत की बैठक की कार्यवाही ऑनलाइन देख सकेंगे। इससे पंचायत स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही को और मजबूती मिलेगी।

अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि विभाग की परिसंपत्तियों के लिए उपलब्ध करवाए गए बजट का रिकॉर्ड भी तैयार किया जा रहा है। करीब 1 करोड़ 14 लाख रुपये की लागत से पंचायत घरों का निर्माण किया जा रहा है और प्रदेश के सभी पंचायत घरों को एक समान स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को केंद्र और राज्य सरकार से प्राप्त बजट का नियमानुसार एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही विकसित भारत जी राम जी के प्रभावी क्रियान्वयन और पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आय के नए स्रोत विकसित करने पर जोर दिया।

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के निदेशक राघव शर्मा ने कहा कि मंत्री के निर्देशों के बाद वर्ष 2024 से अधिकारियों के लिए इस प्रकार की वार्षिक कार्यशाला आयोजित की जा रही है। इसका उद्देश्य विभाग की विभिन्न योजनाओं की अद्यतन जानकारी और आवश्यक प्रशिक्षण उपलब्ध करवाना है। उन्होंने कहा कि हिम ई-पंचायत प्रोसिडिंग पोर्टल भविष्य में पंचायती राज व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।

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