5 सितंबर: राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने युवाओं से हिमाचल प्रदेश की बर्फबारी, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए आधुनिक तकनीक आधारित समाधान विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसी तकनीक विकसित की जानी चाहिए, जिससे संभावित आपदाओं की पूर्व जानकारी मिल सके और समय रहते नुकसान को कम किया जा सके।
राज्यपाल आईआईआईटी ऊना के 8वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन के साथ कृषि, जल संरक्षण और ग्रामीण उद्यमिता जैसे क्षेत्रों में भी तकनीकी नवाचार की जरूरत है। तकनीकी शिक्षा तभी सार्थक है, जब उसका उपयोग समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान में किया जाए।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, सेमीकंडक्टर, रोबोटिक्स और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी तकनीकें तेजी से दुनिया को बदल रही हैं। युवाओं को इन तकनीकों का उपयोग समाज के व्यापक वर्ग के लिए उपयोगी समाधान विकसित करने में करना चाहिए।
राज्यपाल ने दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों और संस्थान के शिक्षकों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि डिग्री विद्यार्थियों की मंजिल नहीं, बल्कि नई जिम्मेदारियों और संभावनाओं से भरी यात्रा की शुरुआत है। उन्होंने युवाओं से निरंतर सीखते रहने और अपने ज्ञान का उपयोग समाज व राष्ट्र के हित में करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत-2047 के विजन को साकार करने में युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। युवाओं को तकनीकी दक्षता के साथ ईमानदारी, चरित्र, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार नागरिकता को भी प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि आईआईआईटी ऊना के युवा इंजीनियर ‘सबका प्रयास’ के संकल्प को नई ऊर्जा और दिशा देंगे।
लोकसभा सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि युवा भारत का भविष्य और देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षा, नवाचार, तकनीक और उद्यमिता के माध्यम से देश के विकास में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहने, खेलों से जुड़ने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश भी दिया।
राज्यसभा सांसद प्रो. सिकंदर कुमार ने कहा कि देश का युवा 21वीं सदी में भारत का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। उन्होंने युवाओं से रोजगार तलाशने के बजाय रोजगार सृजक बनने और ज्ञान, विज्ञान, कला व तकनीक के माध्यम से समाज के विकास में योगदान देने का आह्वान किया।
दीक्षांत समारोह में कुल 206 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 189 बीटेक और 17 एमटेक सीएसई-डेटा साइंस के विद्यार्थी शामिल रहे। एमटेक सीएसई-डेटा साइंस के प्रथम बैच के विद्यार्थियों को भी इस अवसर पर दीक्षित किया गया।
संस्थान के निदेशक प्रो. मनीष गौड़ ने अकादमिक, प्लेसमेंट, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में संस्थान की उपलब्धियों की जानकारी दी। बीटेक के स्नातक बैच ने 95.86 प्रतिशत प्लेसमेंट दर्ज किया। प्लेसमेंट के लिए उपस्थित 169 विद्यार्थियों में से 162 विद्यार्थियों का चयन हुआ। विद्यार्थियों को 53.6 लाख रुपये वार्षिक का उच्चतम पैकेज और 13.46 लाख रुपये वार्षिक का औसत पैकेज मिला।
समारोह में विभिन्न पाठ्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक प्रदान किए गए। इस अवसर पर उपायुक्त जतिन लाल, पुलिस अधीक्षक सचिन हिरेमठ, प्रो. राम कुमार, शासी मंडल एवं सीनेट के सदस्य, संकाय सदस्य, अभिभावक तथा संस्थान समुदाय के सदस्य मौजूद रहे।