30 जुलाई: शिमला जिला में एनसीओआरडी (NCORD) समिति की बैठक में उपायुक्त अनुपम कश्यप ने नशे के बढ़ते खतरे पर चिंता जताते हुए कहा कि इस सामाजिक बुराई के खिलाफ सभी को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को नशे से बचाने के लिए प्रशासन, पुलिस, विभिन्न विभागों, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम जनता की संयुक्त भागीदारी जरूरी है।
बैठक में एक स्वयंसेवी संस्था की प्रतिनिधि ने बताया कि 13 से 14 वर्ष की आयु के बच्चे भी सिरिंज के माध्यम से नशा कर रहे हैं। इससे हेपेटाइटिस जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है और बच्चों का जीवन भी जोखिम में पड़ रहा है। इस पर उपायुक्त ने नशे की चपेट में आए बच्चों और उनके अभिभावकों की नियमित काउंसलिंग पर विशेष जोर दिया।
उपायुक्त ने पुलिस विभाग को नशे के कारोबार में शामिल लोगों की संपत्तियों की जांच तेज करने के निर्देश दिए, जबकि राजस्व विभाग को ऐसे मामलों में चिन्हांकन रिपोर्ट शीघ्र पुलिस को उपलब्ध कराने को कहा।
उन्होंने बताया कि अगस्त माह के दौरान जिले के सभी नशा मुक्ति केंद्रों का औचक निरीक्षण किया जाएगा। निरीक्षण में केंद्रों की कार्यप्रणाली और निर्धारित मानकों की जांच होगी। इसके बाद नशा मुक्ति केंद्रों के संचालकों और अन्य संबंधित हितधारकों के साथ एक विशेष कार्यशाला आयोजित की जाएगी, जिसमें विशेषज्ञ आवश्यक मार्गदर्शन देंगे।
बैठक में पुलिस विभाग ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ की गई कार्रवाई, दर्ज मामलों और विशेष अभियानों की जानकारी दी। वहीं स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण सहित विभिन्न विभागों द्वारा चलाए जा रहे जागरूकता और पुनर्वास कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई।
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि नशा मुक्त समाज का निर्माण तभी संभव है, जब समाज का हर वर्ग अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए इस अभियान में सक्रिय सहयोग दे।