21 अगस्त: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की उपस्थिति में हिमाचल प्रदेश वन विभाग और भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी-बीआईपीपी) के बीच पांच वर्ष के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी का उद्देश्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से प्रदेश की वन एवं चरागाह आधारित अर्थव्यवस्था की अप्रयुक्त संभावनाओं को विकसित करना है।
वन विभाग की ओर से प्रधान मुख्य अरण्यपाल डॉ. संजय सूद और आईएसबी-बीआईपीपी के कार्यकारी निदेशक प्रो. अश्विनी छत्रे ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वन सर्वेक्षण के अनुसार, पांच जैव-संसाधनों में करीब 22,600 करोड़ रुपये की अप्रयुक्त आर्थिक क्षमता मौजूद है। इनमें हरड़ और बेल जैसी औषधीय वनस्पतियां भी शामिल हैं।
इसके अलावा, थांगी (हैजलनट) के पोषण संबंधी और व्यावसायिक महत्व का भी विस्तृत आकलन किया जाएगा। सरकार और आईएसबी-बीआईपीपी की यह साझेदारी वन संसाधनों के बेहतर उपयोग के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।