26 जून : लाहुल-स्पीति जिला मुख्यालय केलांग स्थित उपायुक्त कार्यालय के सम्मेलन कक्ष में जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उपायुक्त किरण भड़ाना ने की। इस दौरान सड़क सुरक्षा, दुर्घटना संभावित स्थलों, यातायात प्रबंधन, स्वास्थ्य सुविधाओं तथा उच्च हिमालयी क्षेत्रों में आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की गई।
उपायुक्त किरण भड़ाना ने पुलिस विभाग और शिक्षा विभाग को स्कूलों तथा अन्य शैक्षणिक संस्थानों में सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान और अधिक प्रभावी ढंग से चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए जन-जागरूकता सबसे प्रभावी माध्यम है।
बैठक में बीआरओ और लोक निर्माण विभाग को पुलिस द्वारा चिन्हित दुर्घटना संभावित स्थलों एवं ब्लैक स्पॉट्स पर चेतावनी संकेतक, क्रैश बैरियर और अन्य सुरक्षा उपाय प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। वहीं सभी एसडीएम को नियमित रूप से सड़क सुरक्षा समिति की बैठकें आयोजित करने तथा क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) को व्यापक जागरूकता अभियान चलाने को कहा गया।
उपायुक्त ने कहा कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आने वाले पर्यटकों को एक्यूट माउंटेन सिकनेस (एएमएस) के लक्षण, जोखिम और बचाव के उपायों की जानकारी देना बेहद जरूरी है। इसके लिए पुलिस और स्वास्थ्य विभाग संयुक्त रूप से जागरूकता वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार-प्रसार करेंगे। साथ ही प्रमुख पर्यटन मार्गों पर ऐसे सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे, जिनमें निकटतम स्वास्थ्य केंद्र, आपदा प्रतिक्रिया दल और पुलिस सहायता केंद्र की जानकारी उपलब्ध होगी।
बैठक में ग्रांफू-काजा-सुमदो मार्ग की सड़क सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। उपायुक्त ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को इस मार्ग पर गति सीमा, दूरी, दिशा-निर्देश और चेतावनी संबंधी साइन बोर्ड लगाने के निर्देश दिए। वहीं लोक निर्माण विभाग को जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई करने को कहा गया।
इसके अलावा काजा और केलांग में ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने तथा स्वास्थ्य सुविधाओं को और सुदृढ़ बनाने पर भी चर्चा हुई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी को अतिरिक्त उपायुक्त काजा के साथ समन्वय स्थापित कर ऑक्सीजन सहित अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए गए।
प्रशासन का मानना है कि सड़क सुरक्षा उपायों को प्रभावी बनाने, पर्यटकों को समय पर आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार से दुर्घटनाओं में कमी आएगी तथा उच्च हिमालयी क्षेत्रों में आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित होगी।