राजगढ़ (सिरमौर) बैसाखी मेला: अंतिम सांस्कृतिक संध्या में लोक संस्कृति की गूंज, नाटी-भजनों ने बांधा समां

18 अप्रैल: जिला सिरमौर के राजगढ़ में श्री शिरगुल महाराज के नाम पर आयोजित जिला स्तरीय बैसाखी मेले की तीसरी और अंतिम सांस्कृतिक संध्या लोक संस्कृति के रंगों से सराबोर होकर भव्य रूप से संपन्न हुई। पहाड़ी, पंजाबी और हिंदी गीतों के साथ भजनों और झूरी की मधुर प्रस्तुतियों ने देर रात तक माहौल को जीवंत बनाए रखा।

इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष जी.आर. मुसाफिर ने विशिष्ट अतिथि के तौर पर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

मुख्य अतिथि कुलदीप सिंह पठानिया ने अपने संबोधन में शिरगुल महाराज को नमन करते हुए मेले की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश देवभूमि है और यहां की समृद्ध लोक संस्कृति विश्वभर में अपनी अलग पहचान रखती है। उन्होंने यह भी कहा कि विकास के क्षेत्र में हिमाचल आज पहाड़ी राज्यों में अग्रणी स्थान पर है। इस दौरान उन्होंने मेला कमेटी द्वारा प्रकाशित स्मारिका का विमोचन किया और समिति को एक लाख रुपये की सहयोग राशि देने की घोषणा भी की।

सांस्कृतिक संध्या में स्थानीय और बाहरी कलाकारों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। कार्यक्रम की शुरुआत बलग (ठियोग) के गायक अमित शांडिल्य ने अपनी नाटियों से की। इसके बाद देवेंद्र ठाकुर ने “फूली करदा फुलटू” और “बांका मुलका हिमाचला” जैसे गीतों से समां बांधा।

भजन गायक सुदर्शन दीवाना ने “मोर पंख वाला” भजन प्रस्तुत कर माहौल को भक्तिमय बना दिया। तनुजा चौहान, हरीश और मदन झालटा ने अपनी नाटियों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया

रीता शर्मा, राजेश धालटा और गीता ने पंजाबी और फिल्मी गीतों के माध्यम से विविध रंग प्रस्तुत किए, जबकि नरेश ने कृष्ण भजन और अनुराग पंवार ने जौंसारी नाटी पेश कर दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी। अशोक तोमर ने ग़ज़ल प्रस्तुत कर कार्यक्रम में अलग रंग भरा।

इसके अलावा सुरेश शर्मा, रमेश चंद और प्रवेश निहालटा ने झूरी और पारंपरिक गीतों के माध्यम से लोक संस्कृति को मंच पर जीवंत किया।

अंतिम प्रस्तुति में अजय चौहान और अंजू तोमर की जोड़ी ने नाटियों की शानदार प्रस्तुति दी, जिससे पूरा पंडाल झूम उठा। “हाय भाटों री बेलोए”, “मेरी भियुरी ना आए” और “अनार दाना” जैसी लोकप्रिय नाटियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया।

इस भव्य आयोजन के साथ ही तीन दिवसीय जिला स्तरीय बैसाखी मेले का सांस्कृतिक कार्यक्रम हर्षोल्लास और उत्साह के साथ संपन्न हो गया।

Social Sharing

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *