2 अक्तूबर, तरसेम जरयाल: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अब भविष्य की कल्पना नहीं, बल्कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन चुकी है। AI आधारित ट्यूटर, व्यक्तिगत शिक्षण प्लेटफॉर्म, स्वचालित मूल्यांकन और वर्चुअल शिक्षण सहायक कक्षाओं में तेजी से बदलाव ला रहे हैं। भारत में भी AI आधारित शिक्षा कार्यक्रमों की शुरुआत हो चुकी है।
हालांकि तकनीकी बदलाव के बीच यह सवाल अहम है कि क्या AI शिक्षक का स्थान ले सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, तकनीक जानकारी उपलब्ध करा सकती है, लेकिन विद्यार्थियों में जिज्ञासा पैदा करने, उनके भावनात्मक पक्ष को समझने और आत्मविश्वास बढ़ाने में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
AI विद्यार्थियों के प्रदर्शन का विश्लेषण कर सीखने की कमियों की पहचान कर सकती है, अतिरिक्त अभ्यास सुझा सकती है, भारतीय भाषाओं में अध्ययन सामग्री उपलब्ध करा सकती है और तत्काल प्रतिक्रिया दे सकती है। इससे शिक्षा को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।
वहीं, AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डेटा गोपनीयता, गलत जानकारी, एल्गोरिथ्मिक पक्षपात और डिजिटल असमानता जैसी चुनौतियां भी सामने हैं। यदि विद्यार्थी AI से मिलने वाली जानकारी को बिना सवाल किए स्वीकार करने लगें तो उनकी आलोचनात्मक सोच प्रभावित हो सकती है। इसलिए AI को शिक्षक के विकल्प के बजाय शिक्षण के सहयोगी के रूप में इस्तेमाल करना जरूरी है।
भविष्य की कक्षा में शिक्षक और तकनीक का संतुलित सहयोग महत्वपूर्ण होगा। इसके लिए शिक्षकों को AI के उचित प्रशिक्षण की आवश्यकता है। AI साक्षरता को आधुनिक शिक्षण का अहम हिस्सा बनाया जाना चाहिए, ताकि शिक्षक तकनीक का जिम्मेदारी और प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर सकें।
भविष्य की शिक्षा में केवल तथ्यों को याद करना ही पर्याप्त नहीं होगा। रचनात्मकता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, नैतिक सोच, टीमवर्क, संचार कौशल और समस्या समाधान जैसी मानवीय क्षमताओं के विकास पर भी जोर देना होगा। AI इन क्षमताओं के विकास में सहयोग दे सकती है, लेकिन उनकी मानवीय समझ और विकास में शिक्षक की भूमिका केंद्रीय रहेगी।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में भी बहुविषयक, प्रौद्योगिकी आधारित और विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा की परिकल्पना की गई है। ऐसे में आने वाले समय में आवश्यकता इस बात की होगी कि कक्षाओं में आधुनिक तकनीक के साथ मानवीय मूल्यों का भी संतुलित समावेश हो।
भविष्य का शिक्षक AI से प्रतिस्पर्धा करने के बजाय उसका उपयोग विद्यार्थियों को बेहतर प्रश्न पूछने, AI से प्राप्त जानकारी का आलोचनात्मक मूल्यांकन करने, नैतिक निर्णय लेने और ज्ञान का रचनात्मक उपयोग करने के लिए करेगा। AI एक प्रभावी शिक्षण सहायक बन सकती है, लेकिन शिक्षा में शिक्षक की केंद्रीय भूमिका बनी रहेगी।
विकसित भारत 2047 की यात्रा में कक्षाएं तकनीकी रूप से समृद्ध होने के साथ मानवीय संवेदनाओं से भी जुड़ी रहें, यही भविष्य की शिक्षा की महत्वपूर्ण आवश्यकता होगी। आखिरकार, शिक्षा केवल ज्ञान का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि मानवता और व्यक्तित्व के निर्माण की प्रक्रिया भी है।