बढ़ते वित्तीय दबाव के बीच सरकार उठाएगी 500 करोड़ का ऋण

8 मई: राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) बंद होने के बाद उत्पन्न वित्तीय संकट के बीच हिमाचल सरकार एक बार फिर कर्ज लेने की तैयारी में जुट गई है। राज्य सरकार जल्द ही 500 करोड़ रुपए का नया ऋण ले सकती है। वित्त विभाग ने इसके लिए जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। इससे पहले वित्तीय वर्ष 2026-27 में सरकार 900 करोड़ रुपए के ऋण के लिए भी आवेदन कर चुकी है।

प्रदेश पर वर्तमान में करीब 1.10 लाख करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज हो चुका है। वहीं सरकार को हर महीने लगभग 2,800 करोड़ रुपए की देनदारियां चुकानी पड़ रही हैं। इसमें कर्मचारियों के वेतन पर करीब 2 हजार करोड़ रुपए, पेंशन पर 800 करोड़ रुपए, पुराने कर्ज के ब्याज भुगतान के लिए 500 करोड़ रुपए और मूलधन चुकाने के लिए करीब 300 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। ऐसे में सरकार के सामने कर्ज लेना मजबूरी बनता जा रहा है।

वित्तीय हालात को देखते हुए सरकार पहले ही मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों के वेतन का 20 से 50 फीसदी हिस्सा छह माह के लिए अस्थायी रूप से स्थगित करने का फैसला ले चुकी है। सरकार को उम्मीद है कि अगले छह महीनों में आर्थिक स्थिति में सुधार होगा, जिसके बाद रोकी गई राशि बहाल कर दी जाएगी।

हालांकि सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनरों के मूल वेतन व पेंशन में कोई कटौती नहीं की है, लेकिन लंबित वित्तीय लाभों और 15 फीसदी महंगाई भत्ते (डीए) की अदायगी फिलहाल मुश्किल नजर आ रही है।

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