19 अगस्त: हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स संयुक्त संघर्ष समिति से जुड़े 18 बड़े संगठनों ने पेंशनरों के बकाया भुगतान को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। समिति ने सरकार पर पेंशनरों के साथ वादाखिलाफी और भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए जल्द ही प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर और अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा ने जारी बयान में कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने 15 अगस्त को पेंशनरों के एरियर के भुगतान को लेकर घोषणा की थी, लेकिन वित्त विभाग की ओर से 18 अगस्त को जारी ज्ञापन से पेंशनरों में भारी रोष है। उनका कहना है कि 1 जनवरी 2016 से 31 जनवरी 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए पेंशनरों को एरियर का भुगतान 35 और 15 प्रतिशत के आधार पर करने का निर्णय उनकी मांगों और मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक में दिए गए आश्वासन के अनुरूप नहीं है।
समिति के अनुसार 13 मई 2026 को मुख्यमंत्री के साथ सचिवालय में हुई बैठक में सरकार ने संबंधित पेंशनरों को कुल बकाया राशि का 40 प्रतिशत 31 जुलाई 2026 तक देने का आश्वासन दिया था। इसमें ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट और कम्यूटेशन की राशि भी शामिल थी। समिति ने आरोप लगाया कि 18 अगस्त के ज्ञापन में इन मदों का कोई उल्लेख नहीं किया गया है।
समिति ने यह भी कहा कि 2016 से 2022 के बीच सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों के सेवाकाल से संबंधित संशोधित वेतन के एरियर को लेकर भी आदेश में स्पष्टता नहीं है। समिति के नेताओं का कहना है कि इससे संबंधित राशि विभाग के डीडीओ द्वारा तैयार कर ट्रेजरी को भेजी जानी होती है, जबकि सेवानिवृत्ति के बाद का पेंशन एरियर ट्रेजरी स्तर पर तैयार किया जाता है। ऐसे में वर्तमान आदेश से पेंशनरों को अपेक्षित वित्तीय लाभ नहीं मिल पाएगा।
संगठन ने सरकार पर पेंशनरों को अलग-अलग वर्गों में बांटने का आरोप भी लगाया। समिति के मुताबिक जिन पेंशनरों की बेसिक पेंशन 40 हजार रुपये से कम है, उन्हें 35 प्रतिशत और क्लास-1 व क्लास-2 के पेंशनरों को 15 प्रतिशत एरियर देने का प्रावधान किया गया है। समिति ने इसे पेंशनरों की एकता को कमजोर करने का प्रयास बताते हुए इसका विरोध किया है।
समिति ने महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की बकाया राशि का भुगतान न होने पर भी नाराजगी जताई। नेताओं ने कहा कि पेंशनरों और कर्मचारियों को 15 प्रतिशत महंगाई भत्ता तथा लंबे समय से लंबित महंगाई भत्ते की किश्तों का भुगतान किया जाना बाकी है। इससे पेंशनरों और कर्मचारियों को हर महीने आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सुरेश ठाकुर और भूप राम वर्मा ने कहा कि सरकार यदि प्रदेश में वित्तीय संकट नहीं होने की बात कहती है तो फिर पेंशनरों की लंबित देनदारियों का भुगतान क्यों नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बोर्डों और निगमों में नियुक्तियों तथा अन्य खर्चों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए और कहा कि पेंशनरों की देनदारियों के भुगतान के लिए भी सरकार को प्राथमिकता तय करनी चाहिए।
संयुक्त संघर्ष समिति ने फैसला लिया है कि जल्द ही प्रदेश स्तरीय बैठक आयोजित कर आगामी आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। समिति ने कहा कि अक्टूबर के पहले सप्ताह में प्रस्तावित आंदोलन को आवश्यकता पड़ने पर उससे पहले भी शुरू किया जा सकता है। नेताओं ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन को लगातार जारी रखने का निर्णय लिया जा सकता है।
समिति ने सभी पेंशनरों से एकजुट होकर आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। साथ ही कर्मचारियों और उनके संगठनों से भी महंगाई भत्ते और एरियर की मांग को लेकर पेंशनरों का समर्थन करने का आह्वान किया गया है।
समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश ठाकुर, अतिरिक्त महासचिव भूप राम वर्मा और मीडिया प्रभारी सैन राम नेगी ने कहा कि पेंशनरों की लंबित देनदारियों का पूरा भुगतान होने तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने सरकार से पेंशनरों की सभी लंबित मांगों पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।