कांगड़ा में पहली बार तैयार हुआ ड्रैगन फ्रूट जैम, किसानों को मिल रहा 50 फीसदी उपदान

19 अगस्त: हिमाचल प्रदेश में किसान अब पारंपरिक फसलों के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली फल फसलों की खेती की ओर बढ़ रहे हैं। कांगड़ा और ऊना जिलों में ड्रैगन फ्रूट की खेती को लेकर किसानों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रदेश सरकार और उद्यान विभाग की ओर से किसानों को आर्थिक सहायता के साथ तकनीकी मार्गदर्शन भी उपलब्ध करवाया जा रहा है।

कांगड़ा के फतेहपुर, नूरपुर, देहरा, इंदौरा और सुलह क्षेत्रों के अलावा ऊना में भी किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती अपना रहे हैं। सरकार की ओर से ड्रैगन फ्रूट, एवोकाडो, ब्लूबेरी, कीवी और स्ट्रॉबेरी जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती के लिए 50 फीसदी उपदान दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ कृषि में विविधता लाना और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना है।

इसी कड़ी में कांगड़ा जिले में पहली बार ड्रैगन फ्रूट से जैम तैयार किया गया है। नगरोटा बगवां स्थित फल डिब्बाबंदी इकाई में प्राकृतिक तरीके से उगाए गए ड्रैगन फ्रूट का उपयोग कर करीब 23 किलोग्राम जैम तैयार किया गया। यह पहल छोटे आकार, अतिरिक्त और बाजार में नहीं बिक पाने वाले फलों के बेहतर उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

ड्रैगन फ्रूट उत्पादक जीवन सिंह राणा और उनके पुत्र आशीष सिंह राणा ने प्राकृतिक खेती के माध्यम से इस फसल को बढ़ावा दिया है। उन्होंने शुरुआत करीब 500 पौधों से की थी, जबकि अब 35 कनाल भूमि में लगभग 5000 पौधों तक खेती का विस्तार कर लिया है। उद्यान विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने ड्रैगन फ्रूट की पंजीकृत नर्सरी भी स्थापित की है, जिससे अन्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधे उपलब्ध हो रहे हैं।

ड्रैगन फ्रूट के प्रसंस्करण को लेकर भी उद्यान विभाग किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है। नगरोटा बगवां की सामुदायिक डिब्बाबंदी सुविधा में आवश्यकता के अनुसार 50 से 65 रुपये प्रति किलोग्राम का प्रसंस्करण शुल्क लिया जाता है। इससे किसानों को बाजार में कम कीमत मिलने वाली या अतिरिक्त उपज को जैम जैसे उत्पादों में बदलकर बेहतर उपयोग करने का अवसर मिल रहा है।

उद्यान विभाग के अधिकारियों ने भी किसानों को तकनीकी सहयोग उपलब्ध करवाया है। संयुक्त निदेशक उद्यान कांगड़ा डॉ. कमल शील नेगी ने खेत और नर्सरी का दौरा कर मार्गदर्शन दिया, जबकि नगरोटा बगवां के विषय विशेषज्ञ डॉ. सुरेश कुमार नेगी ने जैम तैयार करने में तकनीकी सहायता प्रदान की।

किसान जीवन सिंह राणा ने प्रदेश सरकार और उद्यान विभाग का आभार जताते हुए कहा कि उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने, प्रसंस्करण सुविधाएं उपलब्ध करवाने और तकनीकी सहयोग मिलने से किसानों के लिए आय के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

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