पीएम श्री स्कूल नादौन में सर्वसम्मति से सुमिता मेहरा चुनी गईं एसएमसी अध्यक्षा

25 जून : पीएम श्री स्कूल ऑफ एक्सीलेंस राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नादौन में विद्यालय प्रबंधन समिति (एसएमसी) के गठन के लिए अभिभावकों की बैठक आयोजित की गई। प्रधानाचार्य राजेश कुमार की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में बड़ी संख्या में अभिभावकों ने भाग लिया। कन्या विद्यालय और बाल विद्यालय के एकीकरण के बाद गठित यह पहली विद्यालय प्रबंधन समिति है।

विद्यालय के संस्कृत अध्यापक आचार्य नरेश मलोटिया ने बताया कि बैठक के दौरान सुमिता मेहरा को आगामी तीन वर्षों के लिए विद्यालय प्रबंधन समिति की अध्यक्षा चुना गया। इसके अलावा प्रेमलता, ममता रानी, पूनम शर्मा, सुमिता कुमारी, अनीता देवी, आशा देवी, श्रेष्ठा, पूजा ठाकुर, शिवानी कौंडल, अरुण कुमार और पूजा कुमारी को समिति के सदस्य के रूप में चयनित किया गया। चुनाव प्रक्रिया का संचालन रसायन प्रवक्ता अजय कुमार नंदा ने किया, जिसे पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया गया।

प्रधानाचार्य राजेश कुमार ने नवनिर्वाचित समिति को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विद्यालय प्रबंधन समिति विद्यालय और अभिभावकों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का कार्य करती है। समिति विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन, आधारभूत सुविधाओं के विस्तार तथा विभिन्न शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों के प्रभावी संचालन में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने कहा कि अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी से विद्यालय की प्रगति को नई दिशा और गति मिलती है।

बैठक में विद्यालय के विकास, छात्र हितों और भविष्य की योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अभिभावकों ने विद्यालय की उन्नति तथा विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए हरसंभव सहयोग देने का भरोसा दिलाया।

विद्यालय प्रबंधन समिति के गठन की प्रक्रिया को सफल बनाने में उपप्रधानाचार्य परमजीत सिंह, प्रवक्ता अजय कुमार नंदा, राजेश कुमार और अरविंद पटियाल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं शारीरिक शिक्षक संजीव कुमार कौशल ने बैठक की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित किया। इस अवसर पर एसएमसी प्रभारी बबीता ठाकुर, सुरेन्द्र कालिया, रजनीश कुमार, अनु बाला, शिवानी शर्मा, सुषमा ठाकुर, संजीव कुमार, वनिता सहित अन्य अध्यापक भी उपस्थित रहे।

विद्यालय परिवार ने उम्मीद जताई कि नवनिर्वाचित विद्यालय प्रबंधन समिति विद्यालय की शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक गतिविधियों को और अधिक मजबूत बनाने के साथ-साथ अभिभावकों और विद्यालय के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

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