6 अक्तूबर: डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के पांच शिक्षकों को राज्यपाल के कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर जारी नोटिस के बाद सोमवार को मामला गरमा गया। नोटिस का कारण पूछने के लिए शिक्षक कुलपति कार्यालय पहुंचे, लेकिन उन्हें अंदर जाने से रोक दिया गया। इस दौरान शिक्षकों और सुरक्षा कर्मियों के बीच बहस हो गई। स्थिति तनावपूर्ण होने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस को बुला लिया।
जानकारी के अनुसार डॉ. आशु चंदेल की अगुवाई में चार अन्य शिक्षक कुलपति डॉ. एचएस बवेजा से मिलने पहुंचे थे। कार्यालय के बाहर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें रोक दिया। शिक्षक कुलपति से मिलने की मांग पर अड़े रहे और काफी देर तक कार्यालय के बाहर बैठे रहे। कुछ समय बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शिक्षकों को समझाया, जिसके बाद वे अपने कार्यालयों की ओर चले गए।
मामला 2 अक्तूबर को सोलन के गण की सेर में आयोजित राज्यपाल के कार्यक्रम से जुड़ा है। कार्यक्रम में नौणी विश्वविद्यालय के डॉ. आशु चंदेल, डॉ. सुभाष शर्मा, डॉ. रंजना, डॉ. राकेश शर्मा और डॉ. निधिश गौतम मौजूद थे। विश्वविद्यालय प्रशासन का आरोप है कि इन शिक्षकों ने विश्वविद्यालय में आंदोलन कर रहे छात्रों को राज्यपाल से मिलने के लिए कार्यक्रम में पहुंचाया था। हालांकि, शिक्षकों ने इन आरोपों को खारिज किया है।
कुलपति डॉ. एचएस बवेजा ने कहा कि उनके कार्यालय के बाहर हंगामे की जानकारी मिलने के बाद सुरक्षा अधिकारी ने उन्हें अंदर से दरवाजा बंद रखने की सलाह दी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने कार्यालय का दरवाजा तोड़ने का प्रयास किया, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। उन्होंने कहा कि कुलपति से मिलने के लिए विश्वविद्यालय में निर्धारित प्रक्रिया है और उसका पालन किया जाना चाहिए।
वहीं, डॉ. आशु चंदेल ने कहा कि शिक्षक राज्यपाल के कार्यक्रम में छुट्टी वाले दिन आमंत्रण पर शामिल हुए थे। राज्यपाल विश्वविद्यालय के चांसलर भी हैं, ऐसे में उनके कार्यक्रम में शामिल होना गलत नहीं है। उन्होंने कहा कि वे नोटिस का कारण पूछने के लिए कुलपति से मिलने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया। शिक्षकों ने कहा कि यदि कुलपति उनसे नहीं मिलते हैं तो वे विश्वविद्यालय के चांसलर एवं राज्यपाल से मिलकर अपना पक्ष रखेंगे।