9 अक्तूबर: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) सिरमौर की ओर से नाहन में कोर्ट स्टाफ के लिए ‘डिजिटल अरेस्ट’ और साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से विशेष शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सिरमौर के सचिव नव कमल विशेष रूप से उपस्थित रहे।
शिविर के दौरान पुलिस विभाग के साइबर अपराध विशेषज्ञों ने कोर्ट स्टाफ को डिजिटल अरेस्ट और विभिन्न प्रकार की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के तरीकों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी खुद को पुलिस, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को वीडियो कॉल के माध्यम से डराते हैं और उनसे अवैध रूप से पैसे ऐंठते हैं।
विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि भारत में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है और न ही कोई सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के माध्यम से किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करती है। उन्होंने कर्मचारियों को सलाह दी कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक खाते से जुड़ी जानकारी, ओटीपी या अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।
साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करने या आधिकारिक साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाने की सलाह दी गई।
इस अवसर पर डीएलएसए सिरमौर के सचिव नव कमल ने कहा कि साइबर अपराधी आए दिन ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। ऐसे में सतर्कता और जागरूकता के माध्यम से ही इन अपराधों से बचा जा सकता है। उन्होंने कोर्ट स्टाफ से आग्रह किया कि वे शिविर में प्राप्त जानकारी को अपने परिवार और समाज के अन्य लोगों के साथ भी साझा करें, ताकि अधिक से अधिक लोगों को साइबर ठगी का शिकार होने से बचाया जा सके।
शिविर के अंत में कोर्ट स्टाफ के सदस्यों ने साइबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे, जिनका पुलिस विभाग के विशेषज्ञों ने समाधान किया।