13 अगस्त , कविता शांति गौतम : नालागढ़ के प्लासरा क्षेत्र में स्थित दवा निर्माण इकाई किनवन प्राइवेट लिमिटेड को लेकर प्रदूषण और जनस्वास्थ्य से जुड़ी शिकायतों पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने गंभीरता दिखाई है। अदालत ने कंपनी परिसर का संयुक्त निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। निरीक्षण में भूजल दोहन, पानी की गुणवत्ता, औद्योगिक अपशिष्ट और वायु प्रदूषण से जुड़े आरोपों की जांच की जाएगी।
मामले की शुरुआत क्षेत्र के ग्रामीणों की लगातार शिकायतों से हुई। लोगों का आरोप है कि रात और सुबह के समय कंपनी के आसपास तेज रासायनिक दुर्गंध फैलती है, जिससे घरों में रहना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों ने सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन, खांसी और गले में तकलीफ जैसी समस्याओं की शिकायत की है। उनका कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों पर इसका अधिक असर पड़ रहा है।
झीड़ीवाला, गोल जमाला, बेहली, सेरी, दत्तोवाल, रडियाली, नंगल, सुनेथ, भटियां, राख घनसोत, प्लासरा, जोहड़ियां और प्रीतनगर समेत कई गांवों के लोगों ने प्रदूषण को लेकर चिंता जताई है। 11 ग्राम पंचायतों ने भी कंपनी से जुड़े प्रदूषण के मुद्दे पर प्रस्ताव पारित किए हैं। इनमें वायु, ध्वनि और जल प्रदूषण के साथ प्राकृतिक जल स्रोतों पर संभावित प्रभाव तथा रात के समय दुर्गंध फैलने की शिकायतें दर्ज की गई हैं।
याचिका के साथ 857 स्थानीय निवासियों के हस्ताक्षर वाला विरोध-पत्र भी अदालत के समक्ष रखा गया है। कुछ पंचायतों ने प्रदूषण नियंत्रित न होने की स्थिति में उद्योग को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की मांग तक की है।
नालागढ़ नगर पालिका परिषद ने भी इस मामले में चिंता जताई है। 16 जनवरी को नगर पालिका के सामान्य सदन में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर चिकनी खड्ड में औद्योगिक अपशिष्ट छोड़े जाने और कंपनी से प्रदूषित हवा व गैस निकलने संबंधी शिकायतों का उल्लेख किया गया था। नगर पालिका ने पेयजल स्रोतों के नमूने लेकर वैज्ञानिक और रासायनिक जांच करवाने की मांग की थी।
मामले में ग्राम पंचायत रडियाली के निर्वाचित उपप्रधान कुलजीत सिंह का शपथ पर दर्ज बयान भी अदालत के समक्ष रखा गया। उनके अनुसार, ग्रामीणों के बुलाने पर रात करीब 11 बजे सौड़ी गुरुद्वारे पहुंचने पर उन्होंने स्वयं दुर्गंध महसूस की थी। ग्रामीणों ने उन्हें बताया कि दुर्गंध के कारण विशेष रूप से बुजुर्गों को सांस लेने में परेशानी होती है।
वहीं, 13 जुलाई को बार एसोसिएशन नालागढ़ ने भी आपात बैठक कर प्रदूषण को लेकर चिंता जताई थी। एसोसिएशन ने आसपास के लोगों के स्वास्थ्य के साथ-साथ नए कोर्ट कॉम्प्लेक्स के नजदीक होने के कारण वकीलों, न्यायालय आने वाले लोगों और न्यायिक अधिकारियों के स्वास्थ्य पर संभावित प्रभाव का मुद्दा उठाया था।
मामला सीडब्ल्यूपीआईएल संख्या 90/2026, हिमपरिवेश पर्यावरण संरक्षण संस्था बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार एवं अन्य के रूप में 11 अगस्त को मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ के समक्ष आया। अदालत ने 11 पंचायतों, बार एसोसिएशन और नगर पालिका परिषद के प्रस्तावों के साथ-साथ चिकनी खड्ड में औद्योगिक अपशिष्ट छोड़े जाने, प्लांट से दुर्गंध आने और अधिकारियों को दी गई शिकायतों का भी संज्ञान लिया।
अदालत के समक्ष भूजल दोहन से जुड़ा आरोप भी रखा गया। याचिकाकर्ता के अनुसार, कंपनी को एक बोरवेल से अधिकतम 6.71 लाख लीटर प्रतिदिन पानी निकालने की अनुमति है, जबकि वास्तविक भूजल दोहन इससे करीब पांच गुना अधिक होने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों पर हाईकोर्ट ने अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
हाईकोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सोलन के सचिव की मौजूदगी में कंपनी इकाई का संयुक्त निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। निरीक्षण में हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, भूजल प्राधिकरण और जल शक्ति विभाग समेत संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे।
निरीक्षण टीम को यह जांचने के निर्देश दिए गए हैं कि कंपनी परिसर में कितने बोरवेल हैं, वास्तव में कितना भूजल निकाला जा रहा है, पानी की गुणवत्ता कैसी है, औद्योगिक अपशिष्ट आसपास के जल स्रोतों में छोड़ा जा रहा है या नहीं और क्षेत्र में वायु प्रदूषण की वास्तविक स्थिति क्या है।
ग्रामीणों का कहना है कि जांच केवल दिन के समय कंपनी परिसर का निरीक्षण करने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उनका आरोप है कि दुर्गंध की समस्या मुख्य रूप से रात और सुबह के समय सामने आती है, इसलिए इन समयों में भी वायु गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए। साथ ही आसपास के गांवों में भी हवा के नमूने लिए जाने की मांग की जा रही है।
भूजल को लेकर भी ग्रामीणों ने प्रत्येक बोरवेल की भौतिक जांच, फ्लो मीटर, बिजली और पंपिंग रिकॉर्ड की जांच तथा वास्तविक पानी की खपत का आकलन करने की मांग की है। वहीं, चिकनी खड्ड और आसपास के जल स्रोतों से अलग-अलग स्थानों पर नमूने लेकर उनकी वैज्ञानिक जांच करने की अपेक्षा जताई गई है।
अब लोगों की नजर हाईकोर्ट के निर्देश पर होने वाले संयुक्त निरीक्षण और उसकी रिपोर्ट पर है। ग्रामीणों की मांग है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो तथा हवा, पानी, भूजल और औद्योगिक अपशिष्ट से संबंधित वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए। कंपनी को भी नोटिस जारी किया गया है और मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को होगी।