नादौन में दूसरी बेटी के जन्म पर आचार्य नरेश मलोटिया ने बांटे लड्डू, बेटियों के सम्मान का दिया संदेश

19 अक्तूबर, नरेश मलोटिया : समाज में आज भी बेटियों के जन्म को लेकर भेदभावपूर्ण सोच देखने को मिलती है, लेकिन पीएम श्री स्कूल ऑफ एक्सीलेंस राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय नादौन के संस्कृत अध्यापक आचार्य नरेश मलोटिया ने अपनी दूसरी बेटी के जन्म पर विद्यालय में लड्डू बांटकर खुशियां मनाईं। उनकी इस पहल ने समाज को बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच अपनाने और बेटे-बेटी में भेदभाव समाप्त करने का संदेश दिया।

आचार्य नरेश मलोटिया ने कहा कि दो लक्ष्मी स्वरूप बेटियों का पिता बनना उनके लिए सौभाग्य की बात है। दूसरी बेटी का जन्म उनके परिवार के लिए बेहद खुशी का अवसर है। उन्होंने कहा कि जब किसी परिवार में बेटी का जन्म होता है, तो लोगों को बधाई देने के बजाय यह कहना कि अगली बार बेटा हो जाए, उचित नहीं है। इस तरह की बातें अनजाने में ही बेटियों के प्रति भेदभावपूर्ण सोच को बढ़ावा देती हैं।

उन्होंने कहा कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं। वह पिछले 15 वर्षों से बेटियों के विद्यालयों में अध्यापन कार्य कर रहे हैं और उन्होंने देखा है कि बेटियां अपनी प्रतिभा, संस्कारों और उपलब्धियों से परिवार का नाम रोशन करती हैं। उनकी पांच वर्षीय बड़ी बेटी निष्ठा शर्मा भगवद्गीता के श्लोकों के साथ भगवान शिव, सूर्य और गणेश सहित अन्य देवी-देवताओं के स्तोत्रों का पाठ करती है। उन्होंने कहा कि बेटी की प्रतिभा ने उन्हें समाज में सम्मान और प्रतिष्ठा दिलाई है।

आचार्य नरेश मलोटिया ने बताया कि वह अपनी दोनों बेटियों को अच्छे संस्कार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और जीवन में आगे बढ़ने के समान अवसर प्रदान करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि संतान का महत्त्व उसके बेटा या बेटी होने से नहीं, बल्कि उसके गुणों और व्यक्तित्व से निर्धारित होता है। भारतीय संस्कृति में भी संतान के प्रति समान भाव रखने की सीख दी गई है।

दूसरी बेटी के जन्म की खुशी में विद्यालय में लड्डू बांटने पर प्रधानाचार्य राजेश कुमार सहित समस्त अध्यापकों ने आचार्य नरेश मलोटिया को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। विद्यालय परिवार ने उनके घर आई इस खुशी पर प्रसन्नता व्यक्त की।

आचार्य नरेश मलोटिया की यह पहल समाज को यह संदेश देती है कि बेटी का जन्म किसी भी परिवार के लिए गर्व और खुशी का अवसर है। समाज में वास्तविक बदलाव तभी आएगा, जब बेटियों के जन्म पर मन से खुशियां मनाई जाएंगी और बेटे-बेटी के बीच किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाएगा।

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