30 सितंबर: नगर निगम शिमला के हाउस में मंगलवार को शहर में बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक और लगातार सामने आ रहे कुत्तों के काटने के मामलों को लेकर जमकर चर्चा हुई। मेयर सुरेंद्र चौहान और डिप्टी मेयर उमा कौशल की अध्यक्षता में हुई बैठक में करीब डेढ़ घंटे तक इस मुद्दे पर मंथन किया गया। हाउस से पहले भाजपा पार्षदों और शहरवासियों ने कुत्ते के हमले में घायल बच्ची के दादा के साथ प्रदर्शन भी किया।
नगर निगम आयुक्त सचिन कंवल ने आवारा कुत्तों के लिए प्रस्तावित डॉग सेंटरों को लेकर प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि भरयाल, तारादेवी, मल्याणा, नवबहार और दाड़नी के बागीचे में डॉग सेंटर बनाने के लिए स्थान चिन्हित किए गए थे, लेकिन दूरी और स्थानीय लोगों की आपत्तियों के चलते इन स्थानों को रद्द करना पड़ा। अब पांजड़ी स्थित डॉग सेंटर का विस्तार करने पर विचार किया जा रहा है।
बैठक में यह भी सामने आया कि नगर निगम के पास कुत्तों की स्टरलाइजेशन प्रक्रिया के लिए कोई चिकित्सक नहीं है और वीपीएचओ का पद भी खाली है। मेयर सुरेंद्र चौहान ने सरकार से प्राथमिकता के आधार पर चिकित्सकों और अन्य स्टाफ की मांग करने की बात कही।
हाउस में फैसला लिया गया कि शहर के सभी क्षेत्रों का निरीक्षण किया जाएगा। साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने वालों पर जुर्माना लगाने के साथ एफआईआर भी दर्ज करवाई जाएगी। मेयर ने आक्रामक कुत्तों को लंबे समय तक डॉग सेंटर में रखने की अनुमति के लिए कोर्ट जाने की बात कही।
शांति विहार वार्ड के पार्षद विनित शर्मा ने दावा किया कि उनके वार्ड में एक सप्ताह के दौरान 50 से अधिक लोगों को कुत्तों ने काटा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम के सीएचओ को सूचना देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। अन्य पार्षदों ने भी उनकी बात का समर्थन किया।
भट्टाकुफर वार्ड के पार्षद नरेंद्र ठाकुर ने शिकायतों के लिए बनाए गए व्हाट्सऐप ग्रुप को हटाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्षदों की शिकायतों पर संबंधित एचओडी की ओर से जवाब नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि आवारा कुत्तों की समस्या को गंभीरता से लेने की जरूरत है। बैठक में कुत्तों की संख्या को लेकर पूछे गए सवाल पर भी संबंधित अधिकारी स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए।
वहीं, ह्यूमैन संस्था की ओर से 3 अक्टूबर से शिमला शहर में आवारा कुत्तों के लिए निशुल्क एंटी रेबीज टीकाकरण अभियान शुरू किया जाएगा। संस्था ने अभियान में पार्षदों से सहयोग मांगा है। संस्था के अनुसार यह अभियान निशुल्क चलाया जा रहा है और इसके लिए नगर निगम से कोई फंड नहीं लिया जा रहा।
हाउस में पार्षदों ने शहर में बनाए गए फीडिंग जोन की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि चिन्हित फीडिंग जोन प्रभावी साबित नहीं हो रहे हैं और कई डॉग लवर सार्वजनिक स्थानों पर ही आवारा कुत्तों को खाना खिला रहे हैं। पार्षदों ने कहा कि इसका विरोध करने पर कई बार विवाद की स्थिति बन जाती है। उन्होंने सार्वजनिक स्थानों पर नियमों के विपरीत फीडिंग को भी शहर की गंभीर समस्या बताया।