धर्मशाला में राष्ट्रीय सम्मेलन में हिमाचल की डिजिटल पहलों को किया रेखांकित, सुशासन और व्यवस्था परिवर्तन पर दिया जोर

17 अक्तूबर: मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि किसी भी सरकार के प्रभावी संचालन के लिए सुशासन अनिवार्य है। ई-गवर्नेंस की वास्तविक सफलता तकनीकी जटिलता में नहीं, बल्कि आम नागरिकों, विशेषकर दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन को सरल बनाने में निहित है। डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से जन सेवाओं को सरल, त्वरित, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने जिला कांगड़ा के धर्मशाला में प्रशासनिक सुधार एवं ई-गवर्नेंस विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। सम्मेलन में देशभर से वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, नीति निर्माताओं और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक नौकरशाही व्यवस्था से आगे बढ़कर पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शासन प्रणाली विकसित करना समय की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने सत्ता संभालते ही स्पष्ट कर दिया था कि उसका उद्देश्य सुख-सुविधाओं का आनंद लेना नहीं, बल्कि व्यवस्था परिवर्तन के माध्यम से प्रदेशवासियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। सरकार का लक्ष्य हिमाचल प्रदेश के संसाधनों का लाभ प्रदेशवासियों तक पहुंचाना और आने वाले वर्षों में राज्य को देश के सबसे समृद्ध एवं आत्मनिर्भर राज्यों में शामिल करना है। इसी उद्देश्य से ई-गवर्नेंस के माध्यम से जन सेवाओं को बेहतर बनाने और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए प्रभावी कदम उठाए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्पष्ट नीतिगत दृष्टिकोण के साथ राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, जिनकी राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना हुई है। शिक्षा को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए प्री-नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए विशेष प्रयास किए गए हैं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में देशभर में पांचवें स्थान पर पहुंच गया है, जबकि वर्ष 2021 में प्रदेश 21वें स्थान पर था।

उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र को दूसरी सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्य के चिकित्सा संस्थानों में रोबोटिक सर्जरी की सुविधाएं शुरू की गई हैं। इसके अतिरिक्त, 15 से 19 वर्ष पुराने चिकित्सा उपकरणों को बदलने की प्रक्रिया भी आरंभ की गई है। इन प्रयासों से प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों में आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने और मरीजों को बेहतर उपचार प्रदान करने में मदद मिल रही है। लोगों को महंगे इलाज के लिए दूसरे राज्यों में जाने की मजबूरी से राहत देने के उद्देश्य से स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए स्नातकोत्तर सीटों की संख्या बढ़ाई गई है। इसके अलावा विशेषज्ञ चिकित्सकों के वेतन में वृद्धि की गई है और चिकित्सकों तथा पैरामेडिकल कर्मचारियों के सैकड़ों पद प्राथमिकता के आधार पर भरे गए हैं।

उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की लगभग 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। इसे देखते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना सरकार की तीसरी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ग्रामीण आबादी की आय में सम्मानजनक वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। प्रदेश सरकार ने गाय और भैंस के दूध के लिए देश में सर्वाधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित किया है। प्राकृतिक खेती को भी बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके तहत प्राकृतिक पद्धति से तैयार गेहूं 80 रुपये प्रति किलोग्राम, कच्ची हल्दी 150 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्का 50 रुपये प्रति किलोग्राम और अदरक 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने सिंगल विंडो सिटीजन पोर्टल के माध्यम से नागरिक सेवाओं का विस्तार किया है। इसके जरिए लोग घर बैठे या लोक मित्र केंद्रों के माध्यम से विभिन्न सरकारी सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और शिकायत निवारण पोर्टल ने अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दूरदराज के क्षेत्रों से प्राप्त शिकायतों पर संबंधित अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की जाती है और शिकायतकर्ता की संतुष्टि के बिना शिकायत को निस्तारित नहीं माना जाता है।

उन्होंने कहा कि इंतकाल, भूमि बंटवारे और निशानदेही जैसे राजस्व मामलों के लंबित रहने से लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ता था। इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रदेश सरकार ने राजस्व प्रबंधन प्रणाली और राजस्व लोक अदालतों जैसे कदम उठाए हैं। इससे पारदर्शिता बढ़ाने और हजारों लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाने में मदद मिली है।

सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में राज्य सरकार की पहलों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि निराश्रित बच्चों को कानूनी रूप से ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ के रूप में अपनाया गया है। सरकार उनकी शिक्षा, पालन-पोषण, उच्च शिक्षा, कोचिंग, वस्त्र, विवाह और आवास जैसी आवश्यकताओं का ध्यान रख रही है। इसके अतिरिक्त, जिन परिवारों की वार्षिक आय 12 लाख रुपये से अधिक नहीं है, उनके देश-विदेश में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को एक प्रतिशत ब्याज दर पर 20 लाख रुपये तक की ऋण सुविधा प्रदान की जा रही है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हरित हिमाचल के लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके तहत इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देने सहित पर्यावरण संरक्षण के लिए विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने पहाड़ी राज्यों की भौगोलिक परिस्थितियों और पर्यावरणीय चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के वन, नदियां और जलविद्युत संसाधन देश की पर्यावरणीय एवं ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इसके बावजूद प्राकृतिक आपदाओं से निपटने और पर्यावरण संरक्षण की लागत का असंगत बोझ राज्य को उठाना पड़ता है।

उन्होंने राष्ट्रीय विकास में पहाड़ी राज्यों के योगदान का निष्पक्ष आकलन करने तथा जलविद्युत परियोजनाओं, रॉयल्टी, जल उपकर और केंद्रीय वित्तीय सहायता से जुड़े मामलों में उनके हितों पर न्यायसंगत विचार करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश रचनात्मक संवाद, तथ्यों और संवैधानिक माध्यमों से अपने जायज हकों के लिए निरंतर प्रयासरत रहेगा।

मुख्यमंत्री ने धर्मशाला में राष्ट्रीय सम्मेलन के आयोजन के लिए भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी), आयोजकों और राज्य प्रशासनिक टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने आशा जताई कि यह सम्मेलन समावेशी डिजिटल शासन व्यवस्था विकसित करने में सहायक सिद्ध होगा। इससे आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण के साथ-साथ प्रौद्योगिकी का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

इससे पहले, डीएआरपीजी की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा ने स्वागत संबोधन में कहा कि हिमाचल प्रदेश सहित सभी राज्य प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। उन्होंने विभिन्न नवाचारों को व्यापक स्तर पर लागू करने के लिए नियमित संवाद और विचारों के आदान-प्रदान की आवश्यकता पर बल दिया।

हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत ने नागरिकों को पारदर्शी और उत्तरदायी सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए प्रौद्योगिकी को नियमित अंतराल पर उन्नत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

सचिव प्रशासनिक सुधार शैनामोल ए. ने हिमाचल की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों पर आयोजित सत्र को संबोधित किया। स्वास्थ्य सचिव आशीष सिंहमार ने ई-गवर्नेंस के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती प्रौद्योगिकियों से प्रेरित डिजिटल परिवर्तन एवं नवाचार पर अपने विचार प्रस्तुत किए। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव सी.पी. वर्मा ने ई-गवर्नेंस के लिए राष्ट्रीय पुरस्कारों से संबंधित सत्र को संबोधित किया। डीएआरपीजी के अतिरिक्त सचिव पुनीत यादव ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार, ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह, आयुष मंत्री यादविंद्र गोमा, उपमुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड के अध्यक्ष आर.एस. बाली, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार (डिजिटल प्रौद्योगिकी, शासन एवं नवाचार) गोकुल बुटेल, योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया, सांसद अनुराग शर्मा, विधायक आशीष बुटेल, सुरेश कुमार और मलेंद्र राजन, नगर निगम आयुक्त जफर इकबाल, उपायुक्त हेमराज बैरवा सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

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