16 अक्तूबर: लाहुल-स्पीति की घेपन घाट हिमनद झील पर देश की पहली हिमनद झील विस्फोट बाढ़ (ग्लोफ) प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली स्थापित कर दी गई है। समुद्र तल से करीब 4100 मीटर की ऊंचाई पर स्थापित यह अत्याधुनिक प्रणाली झील के जलस्तर, मौसम और पर्यावरणीय बदलावों की लगातार निगरानी करेगी। इससे संभावित बाढ़ के खतरे का समय रहते आकलन करने और लोगों को सतर्क करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही चंद्रा-चिनाब नदी क्षेत्र में उच्चतम बाढ़ स्तर के चिन्हांकन का कार्य भी 100 प्रतिशत पूरा कर लिया गया है।
इस चेतावनी प्रणाली को सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) ने विकसित किया है, जबकि परियोजना के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने वित्तीय सहायता प्रदान की है। दोनों पहल हिमनद झीलों से उत्पन्न होने वाले संभावित बाढ़ के खतरे को कम करने और आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण साबित होंगी।
उपायुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अध्यक्ष किरण भड़ाना इस प्रणाली की स्थापना के लिए लगातार प्रयास कर रही थीं। उन्होंने हाल ही में स्वयं घेपन झील का दौरा कर वहां की स्थिति और संभावित जोखिमों का जायजा लिया था। नवंबर 2023 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने झील के बढ़ते क्षेत्रफल को लेकर जिला प्रशासन को जानकारी दी थी। इसके बाद झील के जोखिमों का आकलन करने, वैज्ञानिक अध्ययन करवाने, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने और आपदा से निपटने की तैयारियों पर काम शुरू किया गया।
अब चेतावनी प्रणाली स्थापित होने से झील से संबंधित आंकड़े लगातार एकत्र किए जा सकेंगे। इससे जलस्तर और मौसम में होने वाले बदलावों पर नजर रखने के साथ संभावित खतरे का समय रहते आकलन करना संभव होगा। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र और प्रतिकूल मौसम की चुनौतियों के बीच इस प्रणाली की स्थापना में जिला प्रशासन, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, अटल बिहारी वाजपेयी पर्वतारोहण एवं संबद्ध खेल संस्थान, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, पुलिस और चिकित्सा दलों ने सहयोग दिया।
प्रणाली में तीन प्रमुख उपकरण शामिल हैं। इनमें तैरते उपकरण पर आधारित झील निगरानी केंद्र, स्वचालित मौसम केंद्र और हिमनद दृश्य निगरानी इकाई शामिल हैं। इन उपकरणों के माध्यम से झील के जलस्तर, मौसम और आसपास के पर्यावरणीय बदलावों से संबंधित जानकारी जुटाई जाएगी।
एकत्रित आंकड़ों और दृश्य जानकारियों का विश्लेषण सी-डैक के उच्च क्षमता वाले संगणक मंच पर किया जाएगा। निर्धारित मानकों के आधार पर यह प्रणाली चेतावनी जारी करने, संभावित बाढ़ की परिस्थितियों का आकलन करने और उसके संभावित प्रभावों का अनुमान लगाने में सहायता करेगी। इससे लाहुल-स्पीति के संवेदनशील क्षेत्रों में आपदा से निपटने की तैयारियों को मजबूती मिलेगी।