23 जून : सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित फैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज अरविंद मल्होत्रा की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। याचिका में उन्होंने हाई कोर्ट में पदोन्नति के लिए अपने नाम पर विचार किए जाने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट कॉलेजियम के कामकाज में न्यायिक निर्देश नहीं दिए जा सकते।
अरविंद मल्होत्रा का कहना था कि हाई कोर्ट कॉलेजियम ने पदोन्नति के लिए उनके जूनियर अधिकारियों के नाम आगे बढ़ाए, जिन्हें बाद में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की मंजूरी भी मिल गई। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता बलबीर सिंह ने दलील दी कि सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट कॉलेजियम को याचिकाकर्ता और एक अन्य जज के नाम पर दोबारा विचार करने को कहा था, लेकिन उनके मामले में ऐसा नहीं किया गया।
हालांकि, जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो कि हाई कोर्ट कॉलेजियम ने याचिकाकर्ता का नाम खारिज कर दिया है। पीठ ने यह भी कहा कि अभी उनकी उम्मीदवारी को अस्वीकार नहीं किया गया है और भविष्य में रिक्त पदों पर विचार किया जा सकता है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता को इंतजार करने की सलाह देते हुए कहा कि कॉलेजियम की प्रक्रिया पूरी होने दी जाए। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि उनकी सेवा के अभी लगभग दस वर्ष शेष हैं और आगे भी पदोन्नति के अवसर उपलब्ध होंगे।
इसके बाद याचिकाकर्ता ने अनुच्छेद 32 के तहत दायर अपनी याचिका को आगे नहीं बढ़ाने की इच्छा जताई। साथ ही उन्होंने प्रशासनिक स्तर पर उचित प्राधिकारी से संपर्क करने अथवा अन्य कानूनी उपाय अपनाने की स्वतंत्रता मांगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस आग्रह को रिकॉर्ड में लेते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।