जुखाला कॉलेज आंदोलन हुआ उग्र, खून से हस्ताक्षर कर छात्रों के भविष्य बचाने की उठी मांग

29 जून अभिषेक मिश्रा : राजकीय महाविद्यालय जुखाला में विज्ञान और वाणिज्य संकाय बहाल करने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब और तेज हो गया है। आंदोलन के पांचवें दिन प्रदर्शनकारियों ने दो घंटे तक चक्काजाम कर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और इसके बाद खूनी हस्ताक्षर अभियान शुरू कर अपना विरोध दर्ज कराया।

धरना स्थल पर उस समय भावुक माहौल बन गया जब 90 वर्षीय बुजुर्ग सहित महिलाओं, युवाओं और विद्यार्थियों ने अपने खून से हस्ताक्षर कर आंदोलन को समर्थन दिया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह केवल हस्ताक्षर नहीं, बल्कि क्षेत्र के विद्यार्थियों के भविष्य को बचाने का संकल्प है।

आंदोलनकारियों का आरोप है कि पिछले पांच दिनों से लोग शांतिपूर्ण तरीके से धरना और प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन का कोई वरिष्ठ अधिकारी उनकी समस्याएं सुनने तक नहीं पहुंचा। इससे लोगों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।

धरने में शामिल जिला परिषद सदस्य सुरभि ठाकुर ने कहा कि विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय बंद करने का फैसला ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों, विशेषकर बेटियों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के भविष्य पर सीधा असर डाल रहा है। उन्होंने सरकार से तुरंत निर्णय वापस लेने की मांग की।

जुखाला कॉलेज बचाओ मंच के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रमेश ठाकुर ने कहा कि यदि सरकार ने जल्द फैसला नहीं बदला तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि आने वाले दिनों में मंत्रियों का घेराव, शिमला कूच और सचिवालय घेराव जैसे बड़े कदम उठाए जाएंगे।

आंदोलनकारियों ने बताया कि खून से हस्ताक्षरित ज्ञापन राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भेजा जाएगा। उनका कहना है कि दावीं घाटी की जनता अपने बच्चों के भविष्य से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि जुखाला कॉलेज में विज्ञान और वाणिज्य संकायों को तत्काल प्रभाव से बहाल किया जाए, अन्यथा आंदोलन लगातार और उग्र रूप लेता जाएगा।

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