20 जून : हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने छात्रों से ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में शोध करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। इसी कड़ी में सोलन के नालागढ़ में प्रदेश की पहली ग्रीन हाइड्रोजन परियोजना स्थापित की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस क्षेत्र में हिमाचल के लिए अपार संभावनाएं हैं और युवाओं को भविष्य की ऊर्जा तकनीकों पर शोध के लिए आगे आना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 10.09 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मल्टी फैकल्टी भवन का उद्घाटन किया। इस भवन में तीन शैक्षणिक मंजिलें, कंप्यूटर-कम-सीबीटी लैब और पार्किंग सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। उन्होंने नवनिर्मित सीबीटी लैब का भी लोकार्पण किया तथा 8.25 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले नए अकादमिक ब्लॉक का शिलान्यास किया। पांच मंजिला इस भवन में पार्किंग, नई कक्षाएं और बढ़ती छात्र संख्या के अनुरूप अतिरिक्त शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई सीबीटी लैब के शुरू होने से शिमला जिले के युवाओं को विभिन्न कंप्यूटर आधारित परीक्षाएं देने के लिए अन्य जिलों में नहीं जाना पड़ेगा। इस लैब में एक समय में करीब 250 अभ्यर्थी परीक्षा दे सकेंगे, जिससे छात्रों को बड़ी सुविधा मिलेगी।
उन्होंने विश्वविद्यालय की विभिन्न विकास योजनाओं और परियोजनाओं की समीक्षा भी की। इस अवसर पर विधायक हरिश जनारथा, सुरेश कुमार, संजय अवस्थी, विवेक शर्मा, शिमला नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान, हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड के अध्यक्ष देवेंद्र श्याम और एचपीयू के कुलपति प्रो. महावीर सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश को लगभग 90 हजार करोड़ रुपये मूल्य की पारिस्थितिकी सेवाएं प्रदान करता है। उन्होंने आशंका जताई कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत राजस्व घाटा अनुदान बंद होने से राज्य को प्रतिवर्ष 8 से 10 हजार करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। इसके बावजूद प्रदेश सरकार राज्य के अधिकारों की रक्षा और उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा हिमाचल को विकास के नए आयामों तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।