4 जून: शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बुधवार को सचिवालय में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए विभागीय कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षा व्यवस्था में सुधार और विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध करवाने के लिए कई नई पहल करने जा रही है।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि स्नातक डिग्री पूरी कर चुके विद्यार्थियों के लिए अप्रैंटिसशिप समाहित डिग्री कार्यक्रम शुरू करने की योजना है। इसके अलावा कॉलेज स्तर पर विदेशी भाषाओं के पाठ्यक्रम भी आरंभ किए जाएंगे, जिससे विद्यार्थियों के लिए रोजगार और करियर के नए अवसर उपलब्ध हो सकें।
उन्होंने हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की 10वीं और 12वीं कक्षा के परीक्षा परिणामों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को विस्तृत विश्लेषण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी और लगातार खराब प्रदर्शन करने वाले शिक्षकों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकी जा सकती है।
रोहित ठाकुर ने विद्यालयों में बायोमीट्रिक उपस्थिति को अनिवार्य बनाने तथा अनुपालन नहीं होने की स्थिति में वेतन कटौती जैसे कदम उठाने पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि 714 पीजीटी और 102 डीपीई पदों के लिए एलडीआर प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। साथ ही कंप्यूटर शिक्षकों से जुड़े मामलों में आवश्यक नियम संशोधन किए जाएंगे। उन्होंने राज्य चयन आयोग और हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेजे गए शिक्षकों के रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश भी दिए।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि कॉलेजों में कौशल आधारित स्नातक पाठ्यक्रम (बी.वॉक) को अच्छा प्रतिसाद मिला है। इसी को देखते हुए सरकार इस योजना के अंतर्गत चार नए पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने सभी ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन अवकाश वाले विद्यालयों में बोर्ड कक्षाओं को छोड़कर दिसंबर माह में परीक्षाएं आयोजित करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में विद्यार्थियों को टैबलेट वितरण योजना की समीक्षा भी की गई। शिक्षा मंत्री ने विभाग को वितरण प्रक्रिया में तेजी लाने और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से सुनिश्चित करने को कहा कि उपलब्ध करवाई गई राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए ही किया जाए।
उन्होंने डॉ. वाई.एस. परमार विद्यार्थी ऋण योजना की भी समीक्षा की। इस योजना के तहत विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए एक प्रतिशत ब्याज दर पर 20 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। शिक्षा मंत्री ने योजना की प्रक्रिया को और अधिक सरल एवं प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।