16 सितम्बर: किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर हिमाचल प्रदेश सहित छह राज्यों के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर टौंस नदी पर प्रस्तावित 422 मेगावाट क्षमता की इस परियोजना के निर्माण पर करीब 15,624 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। समझौते के बाद पिछले आठ वर्षों से चला आ रहा गतिरोध खत्म होने का रास्ता साफ हुआ है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में हुए कार्यक्रम में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल के साथ हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार ने किशाऊ परियोजना में राज्य के हितों की रक्षा के लिए मजबूती से अपना पक्ष रखा है। उन्होंने बताया कि 16 जून 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में हिमाचल प्रदेश की ओर से बिजली घटक पर आने वाली करीब 2,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत को परियोजना के जल घटक से लाभान्वित होने वाले दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा द्वारा वहन करने पर केंद्र सरकार ने सैद्धांतिक सहमति दी थी।
उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने हिमाचल की ओर से 800 करोड़ रुपये की वित्तीय हिस्सेदारी पर सहमति जताई थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने राज्य के सीमित वित्तीय संसाधनों को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। प्रदेश सरकार ने केंद्र के समक्ष यह पक्ष रखा कि जब परियोजना के जल घटक के लिए केंद्र सरकार 90 प्रतिशत अनुदान दे रही है, तो बिजली घटक के लिए भी इसी प्रकार की सहायता का प्रावधान होना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊ परियोजना के कारण हिमाचल प्रदेश के संबंधित क्षेत्र की आबादी को विस्थापन का सामना करना पड़ेगा और परियोजना का प्रभाव राज्य पर अधिक पड़ेगा। ऐसे में प्रदेश पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के विकास में हिमाचल प्रदेश के योगदान और परियोजना से होने वाले प्रभावों को ध्यान में रखते हुए राज्य के हितों की रक्षा आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि परियोजना के बिजली घटक में हिमाचल प्रदेश को प्रतिवर्ष 1,000 मिलियन यूनिट बिजली की हिस्सेदारी मिलेगी। परियोजना के निर्माण के बाद प्रदेश को इससे हर वर्ष 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की आय होने की संभावना है। इससे राज्य के सीमित वित्तीय संसाधनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने हमेशा हिमाचलवासियों के हितों को प्राथमिकता दी है और विभिन्न मंचों पर राज्य के अधिकारों एवं हितों को प्रभावी ढंग से उठाया है। किशाऊ परियोजना में हिमाचल प्रदेश की वैध हिस्सेदारी और हितों को सुरक्षित करना इसी दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
कार्यक्रम में हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव के. के. पंत और अतिरिक्त मुख्य सचिव आर. डी. नजीम भी उपस्थित रहे।